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पाँच क़ैदी ग्वांतानामो से रिहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का कहना है कि ग्वांतानामो बे बंदीगृह में क़ैद चीन के पाँच मुस्लिम बंदियों को रिहा कर दिया गया है लेकिन उन्हें चीन के बजाए अल्बानिया भेजा गया है. अमरीकी अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि उइघुर जाति के इन पाँच चीनी क़ैदियों से किसी तरह का खतरा नहीं है. लेकिन प्रताड़ित किए जाने के खतरे के चलते उन्हें चीन वापस नहीं भेजा जा सकता. उइघुर जाति के लोग चीन में अलग राज्य की माँग कर रहे हैं. अमरीका ने कहा है कि अल्बानिया ने इन चीनी लोगों को अपने यहाँ रखने की पेशकश की थी और ये मानवीय आधार पर की गई एक अहम पेशकश है. रिहा किए गए पाँच चीनी क़ैदियों समेत क्यूबा के ग्वांतानामो बे बंदीगृह में करीब 20 चीनी उइघुर क़ैद हैं और कुल मिलाकर करीब 470 क़ैदी हैं. उइघुर-अमरीकी एसोसिएशन ने पाँच चीनी क़ैदियों को रिहा जाने किए जाने को अविश्वनिय ख़बर बताया है. चीन कहता आया है कि ग्वांतानामो बे में क़ैद उसके नागरिकों को चीन वापस भेजा जाए. उइघुर विद्रोहियों पर चीन सख़्ती से पेश आता रहा है. उधर ग्वांतानामो बे में क़ैद दो बंदी अपना मामला अमरीकी सुप्रीम कोर्ट तक ले गए हैं. इन दोनों को पाकिस्तान में 2001 में 'दुश्मन खेमे के लड़ाके' होने के शक में पकड़ा गया था. लेकिन अमरीकी सेना ने एक साल पहले कह दिया था कि ये दोनों 'दुश्मन खेमे के लड़ाके' नहीं है. बावजूद इसके दोनों को बंदीगृह में रहना पड़ा. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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