|
ग्वांतानामो बंद करोः संयुक्त राष्ट्र अधिकारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐसे समय में जबकि संयुक्त राष्ट्र ग्वांतानामो बे में अमरीकी बंदीगृह के बारे में एक रिपोर्ट तैयार कर रहा है उसकी मानवाधिकार आयुक्त ने बंदीगृह को बंद किए जाने की बात की है. संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार मामलों की वरिष्ठतम अधिकारी ने कहा है कि क्यूबा स्थित ग्वांतानामो बे में अमरीका के बंदीगृह को बंद न करने के अलावा अब अधिक विकल्प नहीं बचा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त लुइस आर्बूर ने कहा है कि वहाँ कुछ बंदी तो इतने अधिक समय से क़ैद हैं कि अमरीकी न्याय व्यवस्था अधिक प्रयत्न करे तो भी जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है. ग्वांतानामो बे के बारे में रिपोर्ट गुरूवार को जारी होनी है और संयुक्त राष्ट्र आयुक्त ने उससे पहले ऐसे बयान दिए हैं. उनका कहना है कि अमरीका को या तो वहाँ रखे गए बंदियों के ख़िलाफ़ सुनवाई करनी चाहिए या अड्डे को बंद कर देना चाहिए. उन्होंने संदिग्ध लोगों का अपहरण कर उनको ऐसे स्थानों पर भेजे जाने की घटनाओं की भी निंदा की जहाँ उनको यातना दी जाती हो. अमरीका सरकार ने इस चलन को रेंडिशन का नाम दिया है. ग्वांतानामो बे के बंदी गृह में उन लोगों को रखा गया है जिन पर कथित रुप से 'आतंकवाद' में शामिल होने का आरोप है. इनमें से कई लोग अफ़ग़ानिस्तान में बंदी बनाए गए थे. इस समय वहाँ लगभग 500 क़ैदी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्वांतानामो बंद करोः संयुक्त राष्ट्र अधिकारी16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'ग्वांतानामो में क़ैदियों को यातना दी गई'14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो में दुर्व्यवहार का नया दावा11 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना 'क्रूर तरीके से आहार देने का आरोप'30 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना अमरीका क़ैदियों को यातनाएँ नहीं देता07 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना ग्वांतानामो कैदियों की स्थिति पर चिंता08 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बंदियों के अधिकारों को सीनेट का समर्थन06 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||