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बंदियों के अधिकारों को सीनेट का समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सीनेट ने विदेशों में अमरीकी सेना की हिरासत में बंदियों के साथ होनेवाले बर्ताव के संबंध में क़ानून बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश का कार्यालय ये कहते हुए इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा था कि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. लेकिन सीनेट में हुए मतदान में 90 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मत डाले जबकि केवल नौ ने इसका विरोध किया. पिछले चार वर्षों से इराक़ की अबू ग़रेब जेल और क्यूबा में अमरीकी नौसैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में बंदियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर चिंता जताई जा रही थी. प्रस्ताव को सदन में रखने वाले रिपब्लिकन सीनेटर जॉन मैक्केन ने कहा है कि नए क़ानून के आने से अमरीकी सेना की हिरासत में बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार पर रोक लग सकेगी. साथ ही उनके अनुसार इससे जाँचकर्ताओं को भी मदद मिलेगी जिन पर बंदियों से पूछताछ कर उनसे जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए दबाव है. छवि सीनेटरों ने ये भी आशा जताई कि इस उपाय से अमरीका की छवि पर लगे धब्बों को दूर करने में सहायता मिलेगी जो अबू ग़रेब जेल में बंदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें बाहर आने के बाद लगे हैं. सीनेटर जॉन मैक्केन ने कहा कि सैनिक चाहते थे कि इस बारे में स्थिति स्पष्ट की जाए. उन्होंने कहा, "हम ये तो चाहते थे कि हमें ख़ुफ़िया जानकारियाँ मिलें लेकिन हमने अपने सैनिकों को ये नहीं बताया था कि क्या-क्या स्वीकृत है और क्या नहीं." उन्होंने आगे कहा, "इसके बाद अगर कुछ गड़बड़ होती थी तो हमने उन्हीं पर आरोप लगाकर उनको सज़ा दे दी." विरोध अमरीका के उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने इस नए बदलाव का विरोध किया था. ऐसा कहा जा रहा था कि व्हाइट हाउस नई व्यवस्था को अपने अधिकारों में दख़ल समझता है और विधेयक पर वीटो लगाकर बाधा खड़ी कर सकता है. लेकिन संवाददाताओं के अनुसार इस बात की संभावना कम ही है. ग़ौरतलब है कि अबू ग़रेब जेल मे बंदियों के दुर्व्यवहार के लिए अमरीकी रक्षा मंत्रालय कुछ मुट्ठी भर सैनिकों को ज़िम्मेदार ठहराता रहा है जिनमें अधिकतर को सैनिक अदालतों में सज़ा सुनाई जा चुकी है. अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी जनरल कॉलिन पॉवेल ने भी क़ानून में बदलाव का समर्थन किया था. |
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