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शनिवार, 13 अगस्त, 2005 को 23:21 GMT तक के समाचार
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दुर्व्यवहार की नई तस्वीरों पर बवाल
अबू ग़रेब
अबू ग़रेब में दुर्व्यवहार की तस्वीरों पर पहले भी काफ़ी बवाल मचा था
अमरीका की सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि इराक़ की अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की नई तस्वीरों को सार्वजनिक न किया जाए.

अदालती दस्तावेज़ के मुताबिक़ अमरीकी सरकार का तर्क है कि इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने से इराक़ में विद्रोहियों को बढ़ावा मिलेगा.

अमरीका में नागरिक अधिकार से जुड़े संगठन क़ैदियों से साथ दुर्व्यवहार की 87 तस्वीरों और चार वीडियो को जारी कराने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.

न्यूयॉर्क के एक ज़िला न्यायाधीश ऑल्विन हेलर्स्टीन अब ये फ़ैसला करेंगे कि इन तस्वीरों को सार्वजनिक करना चाहिए या नहीं.

इससे पहले भी इराक़ की अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें जारी हो चुकीं हैं और दुनिया भर में इस पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.

अमरीका सरकार अब नई तस्वीरों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश कर रही है और कारण ये बता रही है कि अगर तस्वीरें सामने आई तो इराक़ के विद्रोही गुट इसका लाभ उठाने की कोशिश करेंगे.

'दुष्प्रचार'

अदालती दस्तावेज़ो के मुताबिक़ अमरीकी सेना के सर्वोच्च अधिकारी जनरल रिचर्ड मायर्स ने तस्वीरें जारी न करने के संबंध में दलील देते हुए कहा, "यह संभव है कि अगर ये तस्वीरें और वीडियो सामने आ गए तो अल क़ायदा और अन्य गुट इसका लाभ उठाकर दुष्प्रचार करेंगे."

 यह संभव है कि अगर ये तस्वीरें और वीडियो सामने आ गए तो अल क़ायदा और अन्य गुट इसका लाभ उठाकर दुष्प्रचार करेंगे
जनरल रिचर्ड मायर्स

उन्होंने यह भी कहा कि तस्वीरें जारी होने से इराक़ में अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है.

जनरल रिचर्ड मायर्स ने कहा कि ये तस्वीरें इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान सरकार के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकतीं हैं.

अदालती दस्तावेज़ों में जनरल मायर्स की दलील 21 जुलाई को ही दर्ज की गई थी लेकिन हाल ही में यह सार्वजनिक की गई.

शुक्रवार को एक बार फिर पेंटागन ने तस्वीरों को जारी करने के ख़िलाफ़ अपनी मुहिम तेज़ करते हुए अदालत में एक और अनुरोध पत्र दाख़िल किया है.

लेकिन नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने भी इसके ख़िलाफ़ जवाबी अभियान चला रखा है. एक रिटायर्ड अमरीकी कर्नल माइकल फेनेगर ने इन संगठनों की ओर से अदालत को पत्र सौंपा है.

इस पत्र में ज़ोर देकर कहा गया है कि इन तस्वीरों के जारी होने से ही जनता का भला होगा. उन्होंने कहा है कि तस्वीरें जारी हों या न हों- इराक़ में विद्रोही गतिविधियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

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