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ग्वांतानामो बे क़ैदियों के नाम जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के रक्षा मंत्रालय ने एक अदालती आदेश के बाद क्यूबा के ग्वांतानामो बे शिविर में रखे गए बंदियों के नाम और उनके देशों के नाम जारी किए हैं. लेकिन ये नाम किसी सीधी–साधी सरल सूची की शक्ल में नहीं जारी किए गए हैं. ये सूची उन छह हज़ार पन्नों के दस्तावेज़ में शामिल है इन पन्नों में उन सैन्य ट्राईब्यूनलों के बारे में जानकारी है जिनमें 300 क़ैदियों पर मुक़दमे चले हैं. अमरीका ने इन क़ैदियों को दुश्मन ख़ेमे के लड़ाके क़रार दिया है. सैन्य ट्राईब्यूनलों के बारे में जानकारी तो पहले भी जारी की जा चुकी है लेकिन क़ैदियों के नाम उस वक़्त जारी नहीं किए गए थे. मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि ग्वांतनामो बे शिविर के बंदियों के नाम जारी करना शिविर के बारे में जानकारी गुप्त रखने की अमरीकी नीति को एक भारी झटका है. क़ैदियों से जुड़ी जानकारी क़ैदियों से जुड़ी फ़ाइलें सूचना अधिकार क़ानून के तहत जारी की गई है. एपी ने ये फ़ाइलें जारी करने के लिए दरख़्वास्त की थी. बीबीसी के पेंटागन संवाददाता का कहना है कि इन दस्तावेज़ों को पढ़ने और इनके विशलेषण में कई दिन या महीने भी लग सकते हैं. संवाददाता के मुताबिक क़ैदियों के नाम सार्वजनिक हो जाने से, उनके बारे में कई तरह की जानकारी मिल पाएगी. और ये भी कि उन्हें किन हालात में पकड़ा गया और हिरासत में रखा गया है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक सूची में उन्हीं क़ैदियों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं जिन पर सैन्य ट्राईब्यूनलों में मुक़दमे चले हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये संभव है कि बंदीगृह में और क़ैदी भी हों. 'क़ैदी की दास्तां' उधर ग्वांतानामो बे शिविर में बंद एक कुवैती बंदी ने बीबीसी को दिए गए विशेष साक्षात्कार में बताया है कि वहाँ किस तरह भूख हड़ताल करनेवाले बंदियों के साथ ज़बरदस्ती की गई. बीबीसी के टूडे कार्यक्रम के पत्रकार जोन मैनेल ने फवज़ी अल ओदा नाम के इस व्यक्ति के वकील टॉम विलनर के माध्यम से कुछ सवाल रखवाए जिन्हें ग्वांतानामो बे में जाने की छूट थी. फवज़ी अल ओदा ने वहाँ की स्थिति के बारे में कहा, "पहले तो उन्होंने मेरा कंबल, तौलिया, पैंट और जूते ले लिए और फिर 10 दिन तक मुझे बिल्कुल अलग-थलग कर दिया." फवज़ी अल ओदा ने बताया कि वहाँ भूख हड़ताल करनेवाले बंदियों को कुर्सी से बाँध दिया गया और दिन में तीन बार नलियों से खाना खिलाया गया. ओदा ग्वांतानामो बे के उन 84 बंदियों में से एक हैं जो पिछले वर्ष दिसंबर में भूख हड़ताल पर चले गए थे. उनमें से चार लोग अभी भी भूख हड़ताल कर रहे हैं. लेकिन एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने ग्वांतानामो बे में बंदियों को किसी तरह की यातना दिए जाने के आरोप को ग़लत बताया है. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्वांतानामो के एक बंदी की दास्तान03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना अन्नान ने की शिविर बंद करने की माँग17 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना अमरीका ग्वांतानामो बे शिविर बंद नहीं करेगा16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो बंद करोः संयुक्त राष्ट्र अधिकारी16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'ग्वांतानामो में क़ैदियों को यातना दी गई'14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो में दुर्व्यवहार का नया दावा11 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना 'क्रूर तरीके से आहार देने का आरोप'30 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना ग्वांतानामो कैदियों की स्थिति पर चिंता08 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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