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ग्वांतानामो के एक बंदी की दास्तान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्वांतानामो बे में बंद एक कुवैती बंदी ने बीबीसी को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में बताया है कि वहाँ किस तरह भूख हड़ताल करनेवाले बंदियों के साथ ज़बरदस्ती की गई. फवज़ी अल ओदा नामक इस बंदी ने बीबीसी को बताया कि वहाँ भूख हड़ताल करनेवाले बंदियों को कुर्सी से बाँध दिया गया और दिन में तीन बार परखनलियों से खाना खिलाया गया. लेकिन एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने ग्वांतानामो बे में बंदियों को किसी तरह की यातना दिए जाने के आरोप को ग़लत बताया है. बीबीसी ने फवज़ी अल ओदा के पास उनके वकील के माध्यम से भिजवाए थे. ये बयान ऐसे समय आया है जब ग्वांतानामो बे में ही एक और बंदी ने ज़बरदस्ती खाना खिलाए जाने की नीति को क़ानूनी तौर पर चुनौती दी है. ये मामला यमन के नागरिक मोहम्मद बावज़ीर की ओर से दर्ज कराया गया है जो ग्वांतानामो बे में 2002 से ही बंद है. नया बयान बीबीसी के टूडे कार्यक्रम के पत्रकार जोन मैनेल ने फवज़ी अल ओदा के वकील टॉम विलनर के माध्यम से कुछ सवाल रखवाए जिन्हें ग्वांतानामो बे में जाने की छूट थी. ओदा ग्वांतानामो बे के उन 84 बंदियों में से एक हैं जो पिछले वर्ष दिसंबर में भूख हड़ताल पर चले गए थे. उनमें से चार लोग अभी भी भूख हड़ताल कर रहे हैं. फवज़ी अल ओदा ने वहाँ की स्थिति के बारे में कहा,"पहले तो उन्होंने मेरा कंबल, तौलिया, पैंट और जूते ले लिए और फिर 10 दिन तक मुझे बिल्कुल अलग-थलग कर दिया". "फिर एक दिन आकर उन्होंने एक आदेश पढ़कर सुनाया कि अगर तुमने खाने से मना किया तो तुम्हें ज़बरदस्ती कुर्सी से बाँधकर खिलाया जाएगा". ओदा ने बताया कि वहाँ बंदियों को ज़बरदस्ती धातु की बनी एक कुर्सी से बांधकर एक ट्यूब की सहायता से ख़ाना खिलाया गया. ओदा का कहना था कि केवल 29 वर्ष उम्र होने के बावजूद उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे कि वे बूढ़े हो गए हों. उनका कहना था कि ग्वांतानामो बे में उन बंदियों की पिटाई आम बात थी जो किसी तरह की समस्या खड़ी करते थे. मगर बीबीसी से बात करते हुए अमरीकी विदेश विभाग के अधिकारी कॉलीन ग्रेफ़ी ने कहा है कि सभी बंदियों की लगातार जाँच की गई थी और उनके सामने ये प्रस्ताव रखा गया था कि वे हिंसा की निंदा करें. | इससे जुड़ी ख़बरें अन्नान ने की शिविर बंद करने की माँग17 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना अमरीका ग्वांतानामो बे शिविर बंद नहीं करेगा16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो बंद करोः संयुक्त राष्ट्र अधिकारी16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना 'ग्वांतानामो में क़ैदियों को यातना दी गई'14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो में दुर्व्यवहार का नया दावा11 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना 'क्रूर तरीके से आहार देने का आरोप'30 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना ग्वांतानामो कैदियों की स्थिति पर चिंता08 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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