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शुक्रवार, 17 फ़रवरी, 2006 को 06:30 GMT तक के समाचार
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अन्नान ने की शिविर बंद करने की माँग
अन्नान
अन्नान ने संयुक्त राष्ट्र की माँग को जायज़ बताया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि अमरीका को ग्वांतानामो बे बंदी शिविर जितना जल्दी संभव हो बंद कर देना चाहिए.

अन्नान संयुक्त राष्ट्र की गुरुवार को जारी उस रिपोर्ट के समर्थन में बोल रहे थे जिसमें ग्वांतानामो शिविर को तुरंत बंद किए जाने की अनुशंसा की गई है.

उन्होंने कहा कि वो सभी अनुशंसाओं से तो सहमत नहीं हैं लेकिन ये मानते हैं कि क़ैदियों को अनंत काल तक बिना मुक़दमा चलाए हिरासत में नहीं रखा जा सकता.

अन्नान ने कहा कि मुक़दमा चलाए जाने की स्थिति में बंदियों को अपनी बातें सामने रखने का मौक़ा मिल सकेगा.

उल्लेखनीय है कि अभी तक ग्वांतानामो में बंद कुछेक लोगों पर ही मामले चलाए गए हैं.

 ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदी ख़तरनाक आतंकवादी हैं और यह सर्वविदित है कि अल क़ायदा अपने सदस्यों को ऐसे झूठे आरोपों का प्रचार करने का प्रशिक्षण देता है
अमरीकी प्रवक्ता

इससे पहले अमरीकी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को विश्व संस्था की साख पर लगा बट्टा बताया है.

अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैक्केलन ने कहा है कि ग्वांतनामो बे शिविर के बारे में संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट से कुछ नहीं बदला है.

प्रवक्ता स्कॉट मैक्केलन ने कहा, "ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदी ख़तरनाक आतंकवादी हैं और यह सर्वविदित है कि अल क़ायदा अपने सदस्यों को ऐसे झूठे आरोपों का प्रचार करने का प्रशिक्षण देता है."

'अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अनदेखी'

पाँच विशेषज्ञों द्वारा तैयार संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में ग्वांतनामो बे शिविर में बिना मुक़दमा चलाए पाँच साल तक लोगों को बंदी बनाने की वैधता को चुनौती दी है और अमरीका पर अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अनदेखी करने का आरोप लगाया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि या तो बंदियों को छोड़ दिया जाए या फिर उन पर बाक़ायदा क़ानूनी दायरे में मुक़दमा चलया जाए.

ग्वांतानामो बे के बंदी गृह में उन लोगों को रखा गया है जिन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

प्रताड़ना मामलों पर संयुक्त राष्ट्र दूत मैनफ्रेड नोवाक ने बीबीसी से कहा कि ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए 700 पूर्व या मौजूदा बंदियों में से सिर्फ़ नौ को ही सैनिक अदालतों में पेश किया गया है.

इनमें से कई लोग अफ़ग़ानिस्तान में बंदी बनाए गए थे. इस समय वहाँ लगभग 500 क़ैदी हैं.

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