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रविवार, 19 फ़रवरी, 2006 को 08:05 GMT तक के समाचार
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डेनमार्क के कार्टूनिस्ट को अफ़सोस नहीं
प्रदर्शनकारी
हज़रत मोहम्मद के कार्टून बार-बार छापे जाने के बाद दुनिया के कई देशों में प्रदर्शन हुए हैं
डेनमार्क के उस कार्टूनिस्ट ने कहा है कि उसे हज़रत मोहम्मद के उन कार्टूनों को बनाने पर कोई अफ़सोस नहीं है जिसे लेकर दुनिया भर में क्रुद्ध प्रतिक्रिया और हिंसा हुई है.

हिंसा की सबसे ताज़ा घटना नाइजीरिया में हुई है जहाँ 16 लोगों को मार डाला गया और बताया जा रहा है कि उनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक ईसाई थे.

कर्ट वेस्टरगार्ड नामक इस कार्टूनिस्ट ने स्कॉटलैंड के एक समाचारपत्र से कहा है कि ये कार्टून आतंकवाद से प्रेरित होकर बनाए गए थे और उसे इस्लाम ने भड़काने में मदद की है.

पाकिस्तान में एक मौलवी की ओर से कार्टूनिस्ट को मारने के लिए 10 लाख डॉलर का इनाम दिए जाने की घोषणा के बाद से वेस्टरगार्ड भूमिगत हो गए हैं.

उन्होंने ग्लासगो हेराल्ड नामक अख़बार को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए अतिआवश्यक हैं.

लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि उनके बनाए कार्टूनों से बात इतनी बढ़ जाएगी.

कार्टूनिस्ट ने कहा कि उन्होंने ये कार्टून डेनमार्क और पश्चिमी यूरोप में इस्लाम के बारे में किसी तरह की बात कहने को लेकर दोहरे मानदंडों का विरोध जताने के लिए बनाए थे.

विवादास्पद कार्टून

प्रदर्शनकारी
पाकिस्तान में कार्टूनिस्ट के सिर पर इनाम की घोषणा के बाद से कार्टूनिस्ट भूमिगत है

हज़रत मोहम्मद के कार्टून सबसे पहले पिछले वर्ष डेनमार्क के सबसे अधिक बिकनेवाले अख़बार यूलैंस पोस्टन ने प्रकाशित किए थे.

इस अख़बार में एक लेख के साथ 12 कार्टून प्रकाशित किए गए थे जिनमें डेनमार्क की मीडिया में स्वयं ही सेंसरशिप रखने का विरोध किया गया था.

इसके बाद अक्तूबर में मिस्र के एक अख़बार अल फ़ग्र ने भी कुछ कार्टूनों का प्रकाशन किया और विवादास्पद कार्टूनों को 'लगातार होनेवाला अपमान' और एक 'नस्लवादी' बम का नाम दिया.

अक्तूबर में ही 10 मुस्लिम देशों के राजदूतों ने डेनमार्क के प्रधानमंत्री से इन कार्टूनों के प्रकाशन की शिकायत की.

लेकिन इस वर्ष जनवरी में नॉर्वे के एक अख़बार ने फिर कार्टूनों को छापा.

इसके बाद विवाद बढ़ने लगा और अंततः यूलैंस पोस्टन ने माफ़ी माँग ली.

मगर फ़रवरी में फ़्रांस, इटली और स्पेन के कुछ समाचारपत्रों ने मुस्लिम जगत में नाराज़गी की परवाह किए बिना फिर कार्टून छाप दिए.

इसके बाद बात बढ़ती गई और कई देशों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए.

इस दौरान कई लोगों की मौत भी हो चुकी है.

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