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डेनमार्क ने कई देशों से राजनयिक बुलाए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
डेनमार्क सरकार ने इंडोनेशिया में अपने नागरिकों को आगाह किया है कि वे वहाँ से चले आएँ क्योंकि पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए उन्हें निशाना बनाया जा सकता है. डेनमार्क ने कार्टून मामले में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए ईरान, इंडोनेशिया और सीरिया से अपने राजनयिक वापस बुला लिए हैं और दूतावास अस्थाई तौर पर बंद कर दिए गए हैं. डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ख़ुफ़िया रिपोर्टों में बताया गया है कि एक चरमपंथी गुट इंडोनेशिया में डेनमार्क के हितों और लोगों को निशाना बनाने की फ़िराक में है. डेनमार्क ने इंडोनेशिया, ईरान और सीरिया से अपने राजनयिक यह कहते हुए वापिस बुला लिए थे कि उनकी सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा हो गया था. डेनमार्क ने शुक्रवार को सीरिया में अपने राजनयिकों को यह कहते हुए वापस बुला लिया था कि वहाँ उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती. डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सीरिया की राजधानी दमिश्क में उनका दूतावास अस्थाई तौर पर बंद रहेगा क्योंकि सीरिया सरकार ने दूतावास की सुरक्षा घटाकर काफ़ी निचले स्तर पर कर दी है. दमिश्क में डेनमार्क के दूतावास पर एक सप्ताह पहले पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हमला किया गया था. उसके बाद से डेनमार्क और सीरिया के बीच संबंधों में तनाव आ गया था. तूल पकड़ा ग़ौरतलब है कि पैगंबर मोहम्मद का मखौल उड़ाने वाले कार्टून सबसे पहले 30 सितंबर 2005 को डेनमार्क के ही एक अख़बार ने प्रकाशित किए थे.
उसके बाद मुस्लिम देशों में उन कार्टूनों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस के कुछ शीर्ष मुस्लिम संगठनों ने उन अख़बारों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने का फ़ैसला किया है जिन्होंने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद का मखौल उड़ाने वाले कार्टून छापे थे. फ्रांस के पाँच अख़बारों ने भी समर्थन में वो कार्टून फ़रवरी के प्रथम सप्ताह में प्रकाशित किए, जिसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कार्टूनों को फिर से प्रकाशित करने के फ़ैसले को उकसाने वाली कार्रवाई बताया है. उधर मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस्लाम और पश्चिमी देशों के बीच खाई बहुत गहरी हो गई है जो पश्चिमी देशों की विदेश नीति के कारण और गहरा रही है. प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी का कहना है कि बहुत सारे पश्चिमी लोग मुसलमानों को आतंकवादी समझते हैं. लेकिन उन्होंने मुस्लिम जगत से अपील की कि सभी पश्चिमी देशों को एक ही पलड़े में रखकर उनकी आलोचना करने से मुसलमानों को बचना चाहिए. |
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