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स्वाज़ीलैंड में वयस्क एड्स की चपेट में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एड्स के वायरस एचआईवी से संक्रमित वयस्कों की सबसे ज़्यादा संख्या के मामले में अब स्वाज़ीलैंड पहला देश बन गया है. अभी तक ऐसे वयस्कों की सबसे ज़्यादा संख्या बोत्सवाना में थी लेकिन अब एचआईवी से संक्रमित वयस्कों की सबसे ज़्यादा संख्या स्वाज़ीलैंड में हो गई है. इस सप्ताह जारी ताज़ा आँकड़ों में बताया गया है कि स्वाज़ीलैंड में कुल जनसंख्या के 38 प्रतिशत से ज़्यादा वयस्क एचआईवी से संक्रमित हैं. 20 से 30 वर्ष के बीच उम्र वाली महिलाओं में यह प्रतिशत और भी ज़्यादा है यानी इस उम्र की लगभग 56 प्रतिशत महिलाएँ एचआईवी से संक्रमित हैं. स्वाज़ीलैंड के प्रधानमंत्री अब्सोलम थेम्बा द्लामिनी ने बीबीसी को बताया कि उनकी सरकार एड्स के बारे में जागरूकता के लिए अभियान चला रही है. उन्होंने कहा कि इस अभियान में बताया जाता है कि एचआईवी के संक्रमण को रोकना सिर्फ़ महिलाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा नहीं है और इसके लिए सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे. स्वाज़ीलैंड का पड़ोसी देश दक्षिण अफ्रीका ऐसा पहला देश है जहाँ दुनिया भर में सबसे ज़्यादा एड्स से मौत होती हैं. दक्षिण अफ्रीका में एड्स से संबंधित बीमारियों से हर दिन एक हज़ार से ज़्यादा लोग अपनी जान गँवा देते हैं. एकजुट प्रयास गुरूवार, एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर एड्स के प्रसार को रोकने के लिए बनी संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बीमारी की रोकथाम के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया है. संयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम का कहना है कि एचआईवी संक्रमण की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने का एकमात्र उपाय इस रोग के वाहक वायरस का हर तरफ़ से सामना करना है. आज एचआईवी की पहचान हुए लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं और इस दौरान एड्स एक विश्वव्यापी चुनौती बन चुका है. इस वर्ष इस रोग के विषाणुओं से संक्रमित लोगों की संख्या चार करोड़ से ऊपर जा चुकी है. |
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