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एड्सः लक्ष्य ना पाने पर क्षमायाचना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एचआईवी-एड्स कार्यक्रम के प्रमुख ने इस बीमारी के उपचार के लिए तय किए गए विश्वव्यापी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकने के लिए क्षमा माँगी है. संगठन ने इस वर्ष के अंत तक निर्धन राष्ट्रों में 30 लाख लोगों तक एड्स बीमारी की दवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया था. दो वर्ष पहले शुरू किए गए इस कार्यक्रम को नाम दिया गया था 'थ्री बाई फ़ाइव'. ये कार्यक्रम पहले से ही काफ़ी महत्वाकांक्षी था और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष स्वीकार कर लिया कि इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकना संभव नहीं है. संगठन ने इस वर्ष जून में कहा कि 30 लाख के स्थान पर केवल 10 लाख लोगों को ही दवा दी जा सकेगी. क्षमा कार्यक्रम के प्रमुख जिम योंग किम ने बीबीसी के साथ बातचीत करते हुए इस कमी के लिए क्षमा माँगी. उन्होंने कहा,"हम क्षमा माँगने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सकते. मुझे लगता है कि हमें ये स्वीकार करना होगा कि हमने पर्याप्त प्रयास नहीं किया और काफ़ी देर से शुरूआत की". उन्होंने कहा कि फ़िलहाल अगले वर्ष के आरंभ से पहले पक्के तौर पर ये बताना संभव नहीं है कि कुल कितने लोगों को दवा दी जा सकी है. लेकिन उन्होंने कहा कि लक्ष्य पूरा नहीं कर सकने के बावजूद कार्यक्रम को विफल नहीं कहा जा सकता. जिम योंग किम ने कहा,"इस कार्यक्रम से पहले जीवन बचाने के बारे में कोई ज़ोर नहीं दिया जाता था, कई नेता ये कहते थे कि हमें उस पीढ़ी को भूलना होगा जो इस बीमारी से संक्रमित हो गए हैं और हमें अगली पीढ़ी के बारे में सोचना है. तो इसप्रकार हमें लगता है कि जो हुआ है वह असाधारण है". एड्स से ग्रस्त लोगों को जो दवा दी जाती है उसे एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग कहते हैं और उनसे एचआईवी संक्रमित लोगों की स्थिति भी बेहतर हो सकती है और उनके बचे रहने की संभावना भी बढ़ती है. लेकिन अनुमान ये है कि केवल 10 में से एक अफ़्रीकावासी और केवल सात में से एक एशियाई रोगी का इलाज हो पा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में एचआईवी वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अभी चार करोड़ से अधिक है. | इससे जुड़ी ख़बरें एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ी21 नवंबर, 2005 | विज्ञान भारत में बढ़ा एड्स का ख़तरा21 नवंबर, 2005 | विज्ञान एशियाई देशों में एड्स की भयावह तस्वीर01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 'एड्स दवाओं की लक्ष्यपूर्ति संभव नहीं'29 जून, 2005 | पहला पन्ना एड्स के प्रसार पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी02 जून, 2005 | पहला पन्ना एचआईवी पीड़ितों की संख्या पर चिंता02 जून, 2005 | विज्ञान भारत में एड्स 'नियंत्रण से बाहर'19 अप्रैल, 2005 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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