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बुधवार, 12 अक्तूबर, 2005 को 23:46 GMT तक के समाचार
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संविधान के मसौदे में संशोधन 'मंज़ूर'
इराक़ी संविधान
शिया और कुर्द नए संविधान से सहमत हैं
इराक़ की संसद ने संविधान के मसौदे में हुए परिवर्तनों को मंज़ूरी दे दी है ताकि सुन्नी मुसलमानों की आपत्तियों का निवारण किया जा सके.

इन परिवर्तनों पर कोई मतदान नहीं हुआ लेकिन संसद में पेश किए गए प्रस्ताव को पारित मान लिया गया.

इसके बाद एक सुन्नी पार्टी ने कहा है कि वे संविधान के मसौदे के पक्ष में मतदान कर सकते हैं बशर्ते दिसंबर में चुने गए सांसदों को इस संविधान की समीक्षा करने का अधिकार हो लेकिन दूसरी सुन्नी पार्टियाँ अभी भी इसका बहिष्कार कर रही हैं.

शनिवार को इराक़ की जनता नए संविधान पर होने वाले जनमत संग्रह के लिए मतदान करेगी.

 हम सुन्नी मुसलमानों के पास कोई वजह नहीं है कि वे संविधान पर होने वाले जनमत संग्रह का बहिष्कार करें क्योंकि हमने उनकी सभी माँगों और सुझावों पर ध्यान दिया है
इराक़ी राष्ट्रपति

इस बीच इराक़ में हिंसा की घटनाएँ जारी हैं, बुधवार को कम से कम तीस लोगों की मौत हो गई, ज़्यादातर लोग तलाफ़ार में मारे गए जहाँ एक आत्मघाती बम हमला हुआ.

तलाफ़ार के भीड़ भरे बाज़ार में हुए धमाके के बाद भारी अफ़रा-तफ़री फैल गई, यह पिछले कुछ दिनों में वहाँ हुई हिंसा की दूसरी बड़ी घटना है.

प्रस्तावित परिवर्तनों की घोषणा हुमाम हमूदी ने की जो संविधान बनाने वाली समिति के प्रमुख हैं, उन्होंने कहा, "जब हमने परिवर्तनों को पढ़कर सुनाया और किसी को आपत्ति नहीं थी तो हम यह मानते हैं कि इसे मंज़ूर कर लिया गया है."

जो परिवर्तन किए गए हैं उनमें एक समिति के गठन की भी बात है जो इस वर्ष के अंत में संविधान की व्यापक समीक्षा करेगी.

आपत्तियाँ

इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने टेलीविज़न पर प्रसारित एक संदेश में कहा है कि "हम सुन्नी मुसलमानों के पास कोई वजह नहीं है कि वे संविधान पर होने वाले जनमत संग्रह का बहिष्कार करें क्योंकि हमने उनकी सभी माँगों और सुझावों पर ध्यान दिया है."

 जब हमने परिवर्तनों को पढ़कर सुनाया और किसी को आपत्ति नहीं थी तो हम यह मानते हैं कि इसे मंज़ूर कर लिया गया है
संविधान समिति के प्रमुख

सुन्नी मुसलमानों को आशंका है कि संघीय व्यवस्था लागू होने से उत्तरी हिस्से में कुर्द और दक्षिणी हिस्से में शिया समुदाय का नियंत्रण हो जाएगा और तेल की संपदा पर उनका अधिकार नहीं रह जाएगा क्योंकि वे जिस इलाक़े में बहुसंख्यक हैं वहाँ तेल के कुएँ नहीं हैं.

मुख्य सुन्नी पार्टियों में से सिर्फ़ एक इराक़ी इस्लामिक पार्टी ने कहा है कि वे संविधान का समर्थन कर सकते हैं लेकिन बाक़ी पार्टियाँ अभी तक बहिष्कार की बात पर अड़ी हुई हैं.

अगर इराक़ के कुल 18 में से तीन प्रांतों में भी संविधान को दो-तिहाई से अधिक लोगों ने नकार दिया तो उसे नामंजूर माना जाएगा.

इराक़ के चार प्रांतों में सुन्नी मुसलमान बहुसंख्यक हैं इसलिए माना जा रहा है कि अगर वे एकमत होकर संविधान का विरोध करेंगे तो उसका पारित होना असंभव है लेकिन बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि संविधान का ऐसा एकजुट विरोध होने की संभावना कम ही है.

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