| इराक़ के संविधान पर परस्पर विरोधी बयान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में नए संविधान के मसौदे पर शिया और सुन्नी नेताओं के विरोधाभासी बयान आ रहे हैं. शिया नेताओं का कहना है कि संविधान के मसौदे पर सहमति हो गई है और इसे मंज़ूरी के लिए दो दिन के भीतर संसद के सामने रखा जाएगा. उधर सुन्नी नेता सहमति होने की बात का पूरी तरह खंडन करते हैं. उनका कहना है कि शुक्रवार देर रात तक बातचीत होने के बावजूद सहमति नहीं हो पाई है. उधर अरब लीग के महासचिव आम्र मूसा ने भी इराक़ के नए संविधान के मसौदे की कड़ी आलोचना की है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ अरब लीग का एक संस्थापक-सदस्य है और उसकी अरब पहचान को अहमियत न देना अरब एकता के लिए धक्का माना जा रहा है. सुन्नियों के प्रदर्शन सुन्नी समुदाय के हज़ारों लोगों ने देश के संविधान के मसौदे में संघीय ढ़ाँचे के विरोध में बक़ूबा शहर में प्रदर्शन किया है. अनेक प्रदर्शनकारियों के हाथ में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के चित्र थे. इस विषय में बग़दाद में होने वाले संवाददाता सम्मेलन को रद्द कर दिया गया. एक वरिष्ठ शिया नेता ने कहा है कि सुन्नियों की माँगों को लेकर और ज़्यादा रियायतों नहीं दी जा सकती. इराक़ी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता लेथा कुबा का कहना है कि यदि कोई सहमति बन भी जाती है तो संभावना है कि अक्तूबर में होने वाले जनमत संग्रह में इराक़ की जनता संविधान को ख़ारिज कर देगी. ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक शिया नेता को फ़ोन कर संविधान के मसौदे पर आम सहमति बनाने का आग्रह किया है. अंतरिम इराक़ी सरकार में शामिल शिया नेताओं के क़रीबी सूत्रो के हवाले से कहा गया है कि बुश ने अब्दुल अज़ीज़ अल-हकीम से फ़ोन पर बात की है. इसी सप्ताह हुई बातचीत में बुश ने सुन्नी नेताओं की माँगों के प्रति शियाओं को ज़्यादा उदारता दिखाने के लिए कहा है. इस बीच इराक़ी संसद के स्पीकर हाजिम अल-हसनी ने कहा है कि जो भी हो अक्तूबर में संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह कराया जाना तय है. |
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