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'ईरान मुद्दा परिषद में नहीं आना चाहिए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि भारत ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाए जाने के पक्ष में नहीं है. अमरीका चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को सुरक्षा परिषद में लाया जाए जबकि रूस और चीन ने इसका विरोध किया है. विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी इस मुद्दे पर रूस और चीन के विचारों के साथ सहमति जताई है. न्यूयॉर्क में बीबीसी हिंदी सेवा से एक विशेष बातचीत में विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा, “हमारी भी यही राय है और इसके ऊपर वियना में बातचीत चल रही है. भारत भी आइएईए (संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की गवर्निंग बोर्ड का सदस्य है.” उन्होंने कहा कि “भारत की विदेश नीति दिल्ली में तय होती है और ये सोचना भी ग़लत है कि हम किसी के दबाव में आएंगे.” नटवर सिंह ने कहा, “कोशिश ये है कि ईरान के इस मामले पर सबकी एकराय बन जाए. अगर ऐसा नहीं होता और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाया जाता है तो उससे तनाव बढ़ेगा.” नीति नटवर सिंह संयुक्त राष्ट्र महासभा की साठवीं बैठक में हिस्सा लेने के लिए इन दिनों न्यूयॉर्क में हैं और इस बीच उन्होंने दूसरे विश्व नेताओं के अलावा अमरीका की विदेश मंत्री कोंडलीज़ा राइस से भी मुलाक़ात की.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से न्यूयॉर्क में मुलाक़ात के बाद भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक प्रेस कॉनफ़्रेंस में पिछले हफ़्ते कहा था कि “भारत अपने पड़ोस में परमाणु हथियारों से लैस एक और देश को नहीं चाहता”. उन्होंने ये भी कहा था कि “ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रति भारत कोई हमदर्दी नहीं रखता”. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि भारत ने ईरान के प्रति ऐसा रवैया अमरीका के दबाव में अपनाया है. लेकिन बीबीसी हिंदी से विशेष इंटरव्यू में भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इस आरोप से इनकार किया. उन्होंने कहा, “हमारा नज़रिया बदल नहीं रहा है. भारत की विदेश नीति दिल्ली में बनती है. भारत एक महान देश है और ये सोचना भी नहीं चाहिए कि हम किसी के दबाव में आएंगे.” नटवर सिंह ने संयुक्त राष्ट्र की अपनी यात्रा को काफ़ी सफल बताया. पाकिस्तान पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की न्यूयॉर्क में हुई मुलाक़ात को विदेश मंत्री ने “काफ़ी अच्छी मुलाक़ात” बताया. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के साथ हमारे मतभेद नहीं हैं, लेकिन फिर भी हम दोस्ताना माहौल में बात करते हैं.
उन्होंने बताया कि वो तीन अक्तूबर को पाकिस्तान का दौरा करेंगे. नटवर सिंह ने कहा, “जिस विषय पर वो (राष्ट्रपति मुशर्रफ़) बात करना चाहते हैं उस पर हम बात करने को तैयार हैं.” पाकिस्तान बार बार कहता है कि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य करने के लिए कश्मीर के मुद्दे पर बात करना ज़रूरी है. नटवर सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव शिमला समझौते के बाद ख़त्म हो गए क्योंकि शिमला समझौते में दोनों देशों ने कश्मीर को दोतरफ़ा मामला स्वीकार किया है और कहा है कि किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की ज़रूरत नहीं है. सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के भारत के दावे को नटवर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मैं पहले भी कह चुके हैं कि स्थायी सीट की कोशिश हो रही है लेकिन मतभेदों के कारण हो सकता है कि कुछ नहीं हो क्योंकि एक दो प्रभावशाली देश इसके ख़िलाफ़ हैं. नटवर सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की पिछली महासभा में रखा गया प्रस्ताव तो अब ख़त्म हो गया लेकिन जल्द ही भारत अगली महासभा में भी प्रस्ताव रखेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रस्ताव सदस्य देशों के मतदान के लिए नहीं बल्कि इस बात पर ज़ोर डालने के लिए है कि सुरक्षा परिषद का स्वरूप बदलना चाहिए. |
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