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जी-4 विफल नहीं - नटवर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के प्रयासों के लिए बना चार देशों का समूह जी-4 विफल नहीं रहा है हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें बहुत सी दिक्कतें हैं. विदेश राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कह दिया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता तो कभी आसान नहीं थी और 'हो सकता है कि सारे प्रयासों के बाद भी कुछ न हो सके.' लेकिन विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इसके बाद सफ़ाई देते हुए कहा है कि निराशा की कोई स्थिति नहीं है. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा नेता राजनाथ सिंह के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह कहना ग़लत होगा कि भारत के कूटनीतिक प्रयास विफल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि स्थाई सदस्यता के साथ वीटो पॉवर की मांग छोड़ना सही था और अफ़्रीकी देश अभी भी इस मांग पर जुटे हुए हैं जो ग़लत है. विदेश राज्यमंत्री प्रश्नों के जवाब दे रहे थे लेकिन जब पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस पर सवाल उठाए तो जवाब देने के लिए नटवर सिंह को खड़ा होना पड़ा. हालाँकि विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर बहुत सी दिक़्कतें हैं क्योंकि अमरीका और चीन की कुछ आपत्तियाँ हैं और अफ़्रीकी देशों सहित विकासशील देशों के बीच कुछ मतभेद हैं. उन्होंने कहा कि 1945 से अब तक दुनिया बहुत बदल चुकी है और इसके अनुरूप सुरक्षा परिषद को भी बदले जाने की ज़रुरत है. विदेश मंत्री का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र में इस परिवर्तन के लिए संविधान में परिवर्तन करना होगा और यह एक जटिल मामला है. उन्होंने एक और सवाल के जवाब में कहा कि भारत को कुछ अफ्रीकी देशों और कुछ दक्षिण अमरीकी देशों का समर्थन हासिल है. |
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