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न्यूयॉर्क में मिले जी-4 के विदेश मंत्री | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए जी-4 देशों के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक अमरीका में हुई है. इस बैठक का उद्देश्य भारत, जापान, जर्मनी और ब्राज़ील को मिलकर यह तय करना था कि सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के सवाल पर संयुक्त राष्ट्र में मतदान होना चाहिए या नहीं. भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इस बैठक के बाद कहा है कि "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार का एजेंडा अब पूरी तरह दुनिया के सामने आ गया है और इस बारे में बातचीत आगे भी जारी रहेगी." इन देशों के विदेश मंत्री अफ्रीकी देशों के नेताओं के साथ मिलकर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें पर्याप्त वोट हासिल होंगे या नहीं. जी-4 देशों का प्रस्ताव है कि सुरक्षा परिषद में दो अफ़्रीकी देशों सहित छह नए देशों को स्थाई सदस्यता दी जाए. अफ़्रीकी संघ के प्रस्ताव में भी इसी तरह की बात है लेकिन वे नए स्थाई सदस्यों को वीटो का अधिकार देने की बात भी कह रहे हैं, इसके अलावा अफ्रीकी देशों को यह भी तय करना होगा दो अफ्रीकी देश कौन हों. अमरीका ने जी-4 के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है. अहम बैठक संयुक्त राष्ट्र से बीबीसी संवाददाता सूज़ाना प्राइस का कहना है कि बैठकों और चर्चाओं का यह अहम दौर है.
ये चारों विदेश मंत्री अपने प्रस्ताव के लिए समर्थन जुटाने की बड़ी कोशिशें कर रहे हैं. इस प्रस्ताव के अनुसार सुरक्षा परिषद में मौजूदा छह स्थाई सदस्यों सहित कुल 25 सदस्य हो जाएँगे. जी-4 के सदस्य देश मानते हैं कि वे चारों तो सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यता पा ही लेंगे साथ ही दो सीटें अफ़्रीकी देशों को दे दिए जाएँ. जी-4 के देशों को अपने प्रस्ताव के लिए अफ़्रीकी देशों का समर्थन चाहिए होगा लेकिन अफ़्रीकी संघ का अपना एक अलग प्रस्ताव है जिसमें स्थाई सदस्यता के साथ वीटो पॉवर की बात भी कही गई है. यदि जी-4 और अफ़्रीकी संघ को अपने-अपने प्रस्ताव पारित करवाने हैं तो उन्हें 191 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र के कम से कम दो तिहाई सदस्यों का समर्थन जुटाना होगा. विरोध अमरीका इस तरह के किसी भी प्रस्ताव के लिए तैयार नहीं है. लेकिन इन दोनों प्रस्तावों के विरोध में अमरीका अकेला नहीं है. पाकिस्तान, अर्जेंटीना और कनाडा ऐसे देश हैं जो मानते हैं कि सुरक्षा परिषद में नए स्थाई सदस्य होने ही नहीं चाहिए. ये देश सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने सुरक्षा परिषद के विस्तार की योजना का तो समर्थन किया है लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं या नहीं. |
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