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'सुरक्षा परिषद पर प्रस्ताव पास होगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग कर रहे भारत सहित चार देशों ने कहा है कि वे इस महीने के आख़िर तक अपना प्रस्ताव पास करा लेंगे. सुरक्षा परिषद की सदस्यता में विस्तार की मांग कर रहे इन चार देशों में शामिल हैं- भारत, जापान, ब्राज़ील और जर्मनी. संयुक्त राष्ट्र में इन चारों देशों के राजदूतों ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान से मुलाक़ात की. कोफ़ी अन्नान पहले भी सुरक्षा परिषद में सुधार की बात करते रहे हैं. इस बैठक में इन चारों देशों के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए जाने को लेकर चर्चा हुई. ये चारों देश सुरक्षा परिषद की सदस्यता 15 से बढ़ाकर 25 करना चाहते हैं. प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र है कि छह नए सदस्य देशों को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दी जाए. प्रस्ताव लेकिन नई योजना के तहत स्थायी सदस्य के रूप में ब्रिटेन, चीन, रूस, फ़्रांस और अमरीका के साथ शामिल होने वाले नए देशों को 15 साल तक वीटो का अधिकार नहीं मिलेगा.
इन चार देशों के इस नए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा की मुहर लगनी ज़रूरी है. महासभा में यह प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत से पास होना आवश्यक है. कोफ़ी अन्नान से मुलाक़ात के बाद संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के राजदूत गुंटर प्लेगर ने दावा किया कि प्रस्ताव पास हो जाएगा. उन्होंने कहा, "हमें भरोसा है कि हमें आवश्यक दो तिहाई बहुमत मिल जाएगा. लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि हमें इस प्रस्ताव पर ज़्यादा से ज़्यादा समर्थन मिले. क्योंकि यह पिछले 60 सालों के महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है." संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत ने भी उम्मीद जताई कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव इस महीने के आख़िर तक पास हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ राजनयिक ने भी भरोसा व्यक्त किया है कि इन चारों देशों का प्रस्ताव पास हो जाएगा. संभावना व्यक्त की जा रही है कि भारत, जापान, ब्राज़ील और जर्मनी सुरक्षा परिषद के नए स्थायी सदस्य होंगे. |
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