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'स्थाई सदस्य नहीं बढ़ने चाहिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ इस समय इटली की तीन दिन की सरकारी यात्रा पर हैं. बर्लुस्कोनी से मुशर्रफ़ की मुलाक़ात के बाद जारी संयुक्त बयान में इस प्रस्ताव का विरोध किया गया है. इस बयान में ये तो माना गया है कि सुरक्षा परिषद में सुधार की ज़रूरत है मगर इसके तहत पाँच स्थाई सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई जानी चाहिए. दोनों नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ की स्थिति पर भी चर्चा की. भारत ने इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बैठक के दौरान सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाने की माँग की थी. भारत ने इस माँग में जर्मनी, जापान और ब्राज़ील को भी साथ ले लिया है और ये चारों देश मिलकर स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाने की माँग कर रहे हैं. सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाने का पाकिस्तान की ओर से विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें भारत का नाम शामिल है वहीं इटली को डर है कि जर्मनी के आ जाने से यूरोप के मामलों में उसी की बात सुनी जाएगी. दोनों नेताओं ने इराक़ की स्थिति पर चर्चा की और बर्लुस्कोनी ने अल-क़ायदा चरमपंथियों के विरुद्ध पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की सफलता पर मुशर्रफ़ को बधाई दी. मुशर्रफ़ ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई मुलाक़ात के बारे में भी बर्लुस्कोनी को बताया. |
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