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सुरक्षा परिषद में विस्तार का प्रस्ताव पेश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जी-4 के देशों ने सुरक्षा परिषद में व्यापक बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से प्रस्ताव पेश कर दिया है. जी-4 के देशों में ब्राज़ील, भारत, जापान और जर्मनी शामिल हैं. प्रस्ताव में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद में 10 और सीटें बढ़ाई जाएँ, जिनमें से छह सीटें नए स्थायी सदस्यों के लिए हो. प्रस्ताव के मुताबिक़ नए स्थायी सदस्यों में जी-4 के देशों के अलावा अफ़्रीकी देश भी शामिल होंगे. जी-4 के देश फ़िलहाल बिना वीटो के अधिकार के स्थायी सदस्यता के लिए राज़ी हैं. प्रस्ताव पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत है. संयुक्त राष्ट्र में ब्राज़ील के राजदूत रोनाल्डो मोटा सरडेन्बर्ग ने कहा कि सुरक्षा परिषद का मौजूदा स्वरूप 1945 में बना था जो अब पुराना पड़ गया है. सरडेन्बर्ग ने ही औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया और कहा कि पिछले 60 सालों के दौरान दुनिया में सत्ता का संतुलन बदल गया है. उम्मीद जी-4 के देशों को उम्मीद है कि इसी सप्ताह इस प्रस्ताव पर मतदान हो जाएगा. प्रस्ताव पारित होने के लिए 191 सदस्यी संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो तिहाई मतों की आवश्यकता होगी. संयुक्त राष्ट्र स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सुरक्षा परिषद में नए सदस्यों को शामिल करने के मुद्दे पर तो सदस्य देशों में आम तौर पर सहमति है लेकिन इसे कैसे हासिल किया जाए, इस पर बड़े मतभेद हैं. इस समय सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं जिनमें से पाँच स्थायी सदस्य हैं जिन्हें वीटो का अधिकार हासिल है. बीबीसी संवाददाता सुजैना प्राइस का कहना है कि वर्षों से संयुक्त राष्ट्र में इस पर विचार-विमर्श होता रहा है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाए लेकिन इस पर मतभेद भी काफ़ी हैं. सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दो अन्य प्रस्ताव भी हैं, जिन्हें औपचारिक रूप से पेश नहीं किया गया है. अफ़्रीकी संघ के देश इस बात के लिए तो तैयार हैं कि छह देशों को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाना चाहिए, लेकिन वे ये भी चाहते हैं कि इन देशों को वीटो का अधिकार भी मिले. एक अन्य ग्रुप यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेन्सस ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है कि सुरक्षा परिषद में 10 और अस्थायी सदस्यों की जगह बनानी चाहिए जिनका चयन एक नियमित अंतराल के बाद दोबारा होता रहे. इस ग्रुप के एक सदस्य संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने कहा है कि नए स्थायी सदस्य देशों को शामिल करने से सिर्फ़ विशेषाधिकार वाले देशों की संख्या बढ़ जाएगी. |
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