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चीन जी-4 के ख़िलाफ़ अमरीका के साथ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर जी-4 देशों के प्रस्ताव का विरोध करने के मुद्दे पर चीन अमरीका का साथ देगा. जी-4 देशों के समूह में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं. चीन के राजदूत ने कहा कि वो संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन की इस बात से सहमत हैं कि विस्तार करने से सदस्य देशों में दरार पड़ जाएगी. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ जी-4 देशों की योजना का विरोध करने के लिए चीन और अमरीका के पास अपने अपने कारण हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में विस्तार के मुद्दे पर होने वाले विचार विमर्श पर इस बात का काफ़ी असर पड़ सकता है कि चीन और अमरीका मिलकर काम कर रहे हैं. अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सिर्फ़ दो नए सदस्यों को शामिल किया जाए. उसे इस बात पर भी कोई आपत्ति नहीं है कि इन दो देशों में से एक जापान हो. लेकिन चीन जापान को स्थायी सदस्यता दिए जाने के ख़िलाफ़ है. अफ़्रीकी संघ उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव पर चर्चा करने के लिए 16 अफ़्रीकी देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी इथियोपिया में मिल रहे हैं. अफ़्रीकी संघ पहले ही इस बात पर सहमति जता चुका है कि वो सुरक्षा परिषद में दो सीटों की माँग करेगा. इसमें वीटो का अधिकार भी शामिल है. जबकि जी-4 देशों का कहना है कि नए सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं होना चाहिए. इसलिए अगर अफ़्रीकी संघ अतिरिक्त सीटें चाहता है तो उसे इस मुद्दे पर जी-4 देशों के साथ तालमेल बिठाना होगा. अफ़्रीकी देश अभी ये तय नहीं कर पाँए हैं कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए किन दो देशों का नाम दिया जाए. दक्षिण अफ़्रीका, मिस्र और नाइजीरिया मुख्य दावेदार माने जा रहे हैं. |
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