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स्थायी सदस्यता पर कोई आश्वासन नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत को कोई आश्वासन देने की स्थिति में नहीं हैं. वाशिंग्टन में भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह से मुलाक़ात के बाद राइस ने कहा कि भारत की उम्मीदवारी के बारे में अभी और चर्चा किए जाने की ज़रूरत है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के मुद्दे पर अमरीका ब्राज़ील, जर्मनी और जापान समेत कई देशों से बातचीत की प्रक्रिया में है. हालाँकि उन्होंने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए जापान की उम्मीदवारी का खुलकर समर्थन किया. राइस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आर्थिक सहयोग के मामले में जापान अमरीका से ज़्यादा पीछे नहीं है और उसकी इस भूमिका को मान्यता मिलनी चाहिए. दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चाहे किसी तरह के मानक तय किए जाएँ, भारत विस्तारित सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का हक़दार है. भारत को विश्व की मुख्य ताक़तों में शामिल करने के अमरीकी प्रयास के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत को विश्व ताक़त के रूप में उभरने के पीछे अमरीका का हाथ नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक देश भारत ख़ुद अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियाँ सँभालने के लिए तैयार हो रहा है. उन्होंने कहा, "भारत के पास ऐसा करने के लिए आबादी, पहुँच और बढ़ती आर्थिक हैसियत है." राइस ने कहा कि चूँकि भारत एक लोकतंत्र है इसलिए स्वाभाविक तौर पर अमरीका उसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका के सकारात्मक पहलुओं का समर्थन करना चाहता है. |
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