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सुरक्षा परिषद का विस्तार अनिवार्य: नटवर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में सुरक्षा परिषद के विस्तार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. सोमवार को न्यूयॉर्क में उन्होंने कहा, "सब को साथ लेकर चलने, पारदर्शिता और लोकतंत्र की बातें करना बेमानी है, जब सुरक्षा परिषद में इन सिद्धांतों को लागू नहीं किया जा रहा हो." सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुए नटवर सिंह ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को किसी देश की प्रतिष्ठता या ताक़त से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए. इसका संबंध तो दुनिया के शक्ति संतुलन में बदलाव से है." उल्लेखनीय है कि भारत ने ब्राज़ील, जर्मनी और जापान के साथ मिल कर सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए अभियान चलाया है. इन चार देशों के समूह को जी-4 के नाम से जाना जाता है. भारतीय विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक कड़ा प्रस्ताव पारित करने का अनुरोध किया. उन्होंने आतंकवाद और परमाणु अप्रसार के संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति अपनाए जाने की ज़रूरत बताई. नटवर सिंह ने कहा, "आतंकवाद हो या परमाणु अप्रसार, जब तक इनके ख़िलाफ़ एक समान और सतत प्रयास नहीं किए जाएँ, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा सकता." भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र से बड़ी भूमिका किसी की नहीं हो सकती है. |
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