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संयुक्त राष्ट्र सुधार: कुछ सवाल-जवाब
संयुक्त राष्ट्र का लोगो
संस्था में सुधार की बात कई सालों से जारी है
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने महासभा से कहा है कि वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ते ख़तरों को देखते हुए उसे मूलभूत सुधारों पर विचार करना चाहिए.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता बार्नबे मॉसन ने कोफ़ी अन्नान के वक्तव्य की सार्थकता पर उठे सवालों का जवाब दिया है.

कोफ़ी अन्नान इस वक्तव्य से क्या बताना चाह रहे है?

कोफ़ी अन्नान के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्था सुरक्षा परिषद है. जिस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का भार है. वह चाहते हैं कि इसका विस्तार किया जाए जिससे परिषद आधुनिक विश्व की वास्तविकताओं को बेहतर तरीक़े से प्रदर्शित कर सके.

अन्नान का कहना है कि परिषद को यह दिखाना चाहिए कि वो कठिन मुद्दों को प्रभावी तरीक़े से निपटा सकती है. इसमें वह मुद्दा भी शामिल है जिसमें कुछ राष्ट्र अपने पर मंडरा रहे ख़तरे को देखते हुए इकतरफा बल प्रयोग करते हैं.

कोफ़ी अन्नान का सुझाव है कि सुरक्षा परिषद को यह विचार करना चाहिए कि किन परिस्थितयों में वो ऐसी कार्रवाई की अनुमति दे सकती है, उदाहरण के लिए ऐसे चरमपंथी गुटों के विरुद्ध जिनके पास भारी विनाश के हथियार हों.

अन्नान महासभा को भी मज़बूती प्रदान करने के पक्ष में हैं जहाँ बड़ी शक्तियाँ वीटो के अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकती हैं, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह किस तरह से किया जा सकता है.

उन्होनें बोलने के लिए यही समय क्यों चुना है?

यह प्रस्ताव स्पष्ट रुप से संयुक्त राष्ट्र को अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश द्वारा दिए गए धक्के का जवाब है, जब अमरीका ने बिना सुरक्षा परिषद के अनुमोदन के इराक पर हमला कर दिया था.

कोफ़ी अन्नान
अन्नान ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद के विस्तार का मामला एक दशक से कार्यसूची में है

इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कोफ़ी अन्नान इस बात पर भी विचार कर रहें हैं कि अमरीका द्वारा भविष्य में की जाने वाली इस तरह की कार्रवाइयों को किस तरह से संयुक्त राष्ट्र के अधिकार तले लाया जाए.

प्रमुख देश उनके इन प्रस्तावों को किस तरह से लेंगें?

अधिकांश देश इस बात का समर्थन करते हैं कि सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाए, लेकिन समस्या यह है कि विस्तार किस तरह से किया जाए. ब्रिटेन ने हाल ही में इस सुझाव का फिर से समर्थन किया है.

फ़्रांस ने भी संयुक्त राष्ट्र के दूरगामी सुधारों के प्रति अपनी सहमति जताई है. लेकिन वह चाहता है कि इसको लेकर उसके वीटो अधिकार पर कोई ख़तरा नहीं आना चाहिए. इस बात की भी आशा है कि फ़्रांस, इकतरफा बल प्रयोग पर नए नियमों को बनाने का समर्थन कर सकता है.

रुस का भी संभवत: यही मानना है. दूसरी ओर बुश प्रशासन लगातार ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का विरोध कर रहा है जो अमरीका के हितों की रक्षा करने के उसके अधिकार पर रोक लगाता हो.

संयुक्त राष्ट्र का पुर्नगठन कितना व्याहवारिक है?

जैसा कि कोफ़ी अन्नान ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा परिषद के विस्तार का मामला एक दशक से भी अधिक समय से परिषद की कार्यसूची में है. उन्होंने विश्व के नेताओं से कहा है कि समझौते पर नहीं पहुँच पाने की कठिनाई को वह अपनी विफलता का बहाना नहीं बना सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र असेंबली
शक्तिशाली देश महासभा को ऐसे अधिकार देने का विरोध करेंगें जो सुरक्षा परिषद के अधिकारों को चुनौती दें

मुख्य समस्या यह है कि कौन से एशियाई, अफ़्रीकी या दक्षिण अमरीकी देश को नए स्थाई सदस्य के रुप में चुना जाए और यूरोपीय प्रतिनिधित्व का स्तर क्या हो क्योंकि ब्रिटेन और फ़्रांस पहले से ही सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं.

जहाँ तक महासभा को मज़बूत करने का सवाल है, बड़े शक्तिशाली देश महासभा को ऐसे अधिकार देने का विरोध करेंगें जो सुरक्षा परिषद के अधिकारों को चुनौती देते हों. इसलिए इस बात की संभावना काफ़ी कम लगती है.

अन्य और क्या क़दम उठाए जा सकते हैं?

कोफ़ी अन्नान का कहना है कि वो एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन करेंगे जो शांति को मिल रही वर्तमान चुनौतियों की जाँच करेगा और इस बात पर विचार करेगा कि इसका मिलजुल कर किस तरह से सामना किया जा सकता है. यह आयोग संयुक्त राष्ट्र की दूसरी संस्थाओं के कार्यों की समीक्षा करेगा और यह भी विचार करेगा कि इन्हें किस तरह से सुधारा जा सकता है.

उन्होंने आयोग से समय पर रिपोर्ट देने को कहा है ताकि वो अगले वर्ष महासभा के सामने अपनी सिफारिशें रख सकें. यह स्पष्ट है कि पहले की तरह ही कोई भी काम जल्दबाज़ी में नहीं किया जाएगा.

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