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शनिवार, 25 जून, 2005 को 01:06 GMT तक के समाचार
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मेयर से राष्ट्रपति तक का सफ़र
अहमदीनेजाद
अहमदीनेजाद सेना के अधिकारी रह चुके हैं
महमूद अहमदीनेजाद को 2003 में तेहरान का मेयर नियुक्त किया गया तो उन्हें बहुत कम लोग जानते थे, जब वे राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए तो शायद ही किसी ने उनकी जीत की भविष्यवाणी की हो.

पहले दौर के परिणामों ने सबको चौंका दिया, सात उम्मीदवारों की दौड़ में अहमदीनेजाद दूसरे नंबर पर आ चुके थे, पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाशमी रफसंजानी को सीधी टक्कर देने के लिए.

बीबीसी के ईरानी मामलों के जानकार सादेक़ सबा कहते हैं कि अहमदीनेजाद ने अपने चुनाव प्रचार में धन नहीं लगाया लेकिन उनका काम उनके रूढ़िवादी समर्थकों ने आसान कर दिया, उनका प्रचार मस्जिदों के ज़रिए होता रहा.

एक मामूली लुहार परिवार में 1956 में पैदा हुए अहमदीनेजाद ने तेहरान का मेयर बनते ही ऐसे क़दम उठाए जिनसे ज़ाहिर हो गया कि वे रूढ़िवादी नेता हैं और देश के धार्मिक नेतृत्व के समर्थक हैं.

ईरानी सेना में अधिकारी रह चुके अहमदीनेजाद ने मेयर बनते ही तेहरान के फास्ट फूड रेस्तराँ बंद करा दिए और शहर में नौकरी करने वाले मर्दों के लिए पूरे बाज़ू की कमीज़ पहनना और दाढ़ी रखना अनिवार्य कर दिया गया.

अहमदीनेजाद उस समय भी चर्चा में आए जब उन्होंने ब्रितानी फुटबॉल खिलाड़ी डेविड बेकम के विज्ञापनों पर भी रोक लगा दी, ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौक़ा था जब किसी पश्चिमी देश का कोई व्यक्ति प्रचार का मॉडल था.

उन्होंने अपने पूर्ववर्ती सुधारवादी मेयर के कई फ़ैसलों को बदल दिया, सुधारवादी माने जाने वाले राष्ट्रपति ख़ातमी उनसे इतने नाराज़ थे उनके कैबिनेट बैठकों में भाग लेने पर रोक लगा दी थी. ईरान में बड़े शहरों के मेयर कैबिनेट की बैठक में आम तौर पर शामिल होते हैं.

अहमदीनेजाद तेहरान विश्वविद्यालय में लेक्चरर भी रह चुके हैं और वहीं से उन्होंने ट्रांसपोर्ट और ट्रैफ़िक के विषय पर पीएचडी भी की है.

लोकप्रियता

महमूद अहमदीनेजाद की निजी वेबसाइट उन्हें 'मर्दोमयार' के रूप में पेश करती है यानी जनता का दोस्त, वे सादा जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले प्रमुख लोगों में उनकी गिनती होती है.

महमूद अहमदीनेजाद (बाएँ से पहले)
महमूद अहमदीनेजाद काफ़ी लोकप्रिय हैं

वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के समर्थक रहे हैं, उनकी जीत से ज़ाहिर है अमरीका और यूरोपीय देशों की चिंताएँ बढ़ेंगी.

कई ख़ुफ़िया ऑपरेशनों में शामिल बताए जाने वाले अहमदीनेजाद की वेबसाइट अमरीका के बारे में कहती है, "वे हमें आसानी से तरक्की नहीं करने देंगे लेकिन हमें भी उनके आगे हार नहीं मानना चाहिए."

अमरीका से रिश्ते सामान्य करने के बारे में भी उनकी राय दो टूक है, "अमरीका ने हमसे रिश्ता तोड़ा था, वह इस्लामी क्रांति को तबाह करना चाहता है, अमरीका ने रिश्ता तोड़ने का एकतरफ़ा फैसला किया था, अब अमरीका से दोबारा संबंध बहाल करने का फ़ैसला ईरान के हाथों में है."

उन्हें ईरान की दूसरी पीढ़ी के रूढ़िवादियों का समर्थन हासिल है जो ईरानी संसद मजलिस में काफ़ी ताक़तवर हैं.

उनकी वेबसाइट बताती है कि उन्होंने ईरान में स्टूडेंट यूनियन का गठन करने में मदद की थी जिसने अमरीकी दूतावास पर क़ब्ज़ा कर लिया था जो लगभग सवा साल तक चलता रहा था.

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