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अमरीका में ईरानी समुदाय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
1980 के दशक में ईरान में इस्लामी क्रांति आने के बाद और ईरान-इराक़ युद्ध से बचने के लिए बहुत से ईरानी अपना मुल्क छोड़कर दूसरे मुल्कों में पलायन कर गए. अमरीका के साथ ईरान के रिश्ते ख़राब होने के बावजूद बहुत से ईरानियों ने अमरीका में भी पनाह ली लेकिन दशकों से अमरीका में रहने के बावजूद बहुत से ईरानियों के लिए अमरीका एक बेगाना मुल्क ही है. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ अमरीका में क़रीब ढाई लाख ईरानी रहते हैं जबकि ग़ैर सरकारी तौर पर इनकी संख्या 10 लाख से ज़्यादा बताई जाती है. अमरीका में रहने वाले ईरानी लोगों में से ज़्यादातर ईरान में इस्लामी धार्मिक हुकूमत के विरोधी ही रहे हैं और ये लोग देश के पिछड़ेपन की ज़िम्मेदारी भी इसी सरकार की ग़लत नीतियों पर थोपते हैं. तीस साल से अमरीका में रह रहे ईरानी मूल के अर्थशास्त्री हामिद ज़ंगेने पेन्सिल्वेनिया के एक विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं. ईरान की अर्थव्यवस्था के बारे में वह कहते हैं, “एक तो ईरान में आम लोगों की ज़िंदगी में आज़ादी नहीं है और अमरीका से रिश्ते ख़राब होने के कारण पिछले 26 सालों में ईरानी अर्थव्यवस्था का बुरा हाल हो गया है, साथ ही आबादी दोगुनी हो जाने के कारण ग़रीबी भी ज़्यादा बढी है.” लोगों को आम तौर पर यही शिकायत है कि ईरान के धार्मिक गुरू आयतुल्ला अली ख़मेनेई ही विलायते फ़कीह की नीति के तहत देश के सारे महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं जो कि सख़्त तौर पर इस्लामिक धार्मिक फैसले ही होते हैं. न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में फ़ारसी के प्रोफ़ेसर रह चुके इराज अनवर विलायते फ़कीह को सिरे से नकारते हैं. वह कहते हैं, “मैं तो इसके बिल्कुल खिलाफ़ हूँ. विलायते फ़कीह को मैं कभी भी नहीं मान सकता. इराक़ के आयतुल्ला अली सीस्तानी, जो कि सबसे बड़े आयतुल्ला हैं, वह भी विलायते फ़कीह के खिलाफ़ हैं. यह तो एक तरह की तानाशाही है.” चुनाव और उम्मीदें ईरानी मूल के लोग ईरान के चुनावों से भी कोई उम्मीद नहीं रखते हैं.
अमरीका में ईरानी मूल के उन लोगों को भी पनाह दी गई है जो ईरान के पूर्व बादशाह शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के समर्थक हैं. ये लोग रेडियो और टेलीविज़न चैनलों के माध्यम से फ़ारसी में ईरान की इस्लामी सरकार के खिलाफ़ प्रचार-प्रसार में लगे रहते हैं. अमरीका के कैलीफोर्निया, न्यूयॉर्क और टैक्सस जैसे राज्यों से रेडियो और टेलीविज़न प्रसारण चौबीस घंटा चलते हैं और कुछ प्रसारण तो ईरान के अंदर तक भी पहुँचते हैं. ऐसे कम से कम तीस प्रसारण केंद्र अमरीका में ईरानी हुकूमत के खिलाफ बग़ावत का बिगुल बजाते रहते हैं. अमरीका में रह कर सारे आराम और सुहाने सपनों के बीच बहुत से ईरानी फिर भी अपने वतन को छोड़ने की कसक से दूर नहीं हो पाए हैं. दूरी और चैन ज़्यादातर ईरानी जो अपने वतन से दूर एक बेगाने मुल्क में पनाह लेने को मजबूर हुए, उन्हे किसी करवट चैन नहीं मिलता है. शहला एक ऐसी ही ईरानी महिला हैं जो एक संगीतकार हैं और न्यूयॉर्क में ईरानी संगीत सिखाती हैं. वह ईरान की हर चीज़ को याद करके बेचैन हो जाती हैं. “मुझे अपने वतन की मिट्टी, हवा, पानी, संगीत सब कुछ याद आता है. वहाँ की सुबह याद आती है, शाम याद आती है. घरवाले याद आते हैं. मैं पिछले 22 साल से अपने घर वालों से नहीं मिल सकी हूँ.” “मैं तो ईरान में मुल्लाओं की हुकुमत का जल्द से जल्द ख़ात्मा देखना चाहती हूँ, इन्होंने बहुत ज़ुल्म ढाए हैं लोगों पर.”
अमरीकी समाज और संस्कृति से नाता जोड़ने में ईरानी मूल के लोग काफ़ी दिक्कतों का सामना करते हैं. दो दशक से ज़्यादा से ईरान और अमरीका के बीच जारी दुश्मनी का ख़ामियाज़ा अमरीका में रहने वाले ईरानी लोगों को सहना पड़ता है. कुछ अमरीकी अब भी ईरानियों को शक की नज़र से देखते हैं. इराज अनवर कहते हैं, “सिर्फ़ ईरानी होने के कारण बहुत से लोगों को जान से मार दिया गया, मुझे तो अमरीकी लोगों ने बहुत निराश किया और अमरीकी सरकार ने भी इस मामले में कोई मदद नहीं की. दसियों साल से हम यहाँ रह रहे हैं लेकिन फिर भी अमरीकियों को हम पर शक है.” कई दशक से अमरीका में रहने के बावजूद बहुत से ईरानियों को अब भी अमरीका एक बेगाना मुल्क ही लगता है. इसी लिए वह अपनी संस्कृति की ओर देखते हैं. अज़म अली लास एंजेलेस में रहती हैं और फ़ारसी और उर्दू की लोकप्रिय संगीतकार भी हैं. अपने फ़न को वह जी जान से चाहती हैं और ख़ासकर अपने ईरानी होने का उन्हे बहुत गर्व है. अमरीकी नागरिकता लेने के बाद भी उन्हे अमरीका की ज़िंदगी और अमरीका से शिकायतें भी हैं. वह कहती हैं, “मुझे यहाँ अमरीका में रहते हुए ऐसा लगता है कि जैसे मेरा यहाँ से कोई ताल्लुक़ ही नहीं है क्योंकि यहाँ सब कुछ इतना अजनबी सा है, किसी को किसी की परवाह नहीं है. मुझे अपने ईरानी समाज के तौर तरीक़े बहुत पसंद हैं, लोगों में गर्मजोशी है, ख़ुलूस है, मेल-मिलाप है. यहाँ तो मैं अपने पड़ोसी तक का नाम नहीं जानती.”
अमरीका में रहने वाले ईरानी लोग अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए बड़े जतन करते हैं. चाहे ईरानी नया साल नौरूज़ मनाने की बात हो या चहार शंबे सूरी, सभी त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं. कैलीफोर्निया, न्यूयॉर्क और शिकागो में ईरानी लोग नए साल की शुरूआत के मौक़े पर यानी नौरूज़ के दिन भव्य परेड निकाली जाती है जिसमें सारे ईरानी मूल के लोग शामिल होते हैं. इसके अलावा ईरानी अमरीकियों ने इन शहरों में जहाँ-तहाँ छोटा-छोटा ईरान भी बसा रखा है जिसमें ईरानी व्यंजन, संगीत और कला को ज़िंदा रखा जाता है. भले ही लाखों ईरानी अपना मुल्क छोड़कर अमरीका में पनाह लिए हों लेकिन अमरीका की विदेश नीति की आलोचना करने से वे बाज़ नहीं आते हैं, ख़ासकर मघ्यपूर्व में अमरीकी नीति की. बहुत से ईरानी लोग अब भी ईरान आते-जाते हैं लेकिन बहुत से ऐसे भी हैं जो कई दशक से अपने मुल्क का दीदार करने को तरस रहे हैं. ये वे लोग हैं जो ईरानी सरकार के खुल्लम-खुल्ला विरोधी हैं इसलिए ईरान जाने का साहस नहीं जुटा पाते हैं. हामिद ज़ंगेने ईरानी सरकार के विरोध में अमरीका में मुहिम चलाते हैं इसलिए वह तीस साल से ईरान नहीं गए हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हे यह मंज़ूर नहीं है कि अमरीका ईरान पर चढ़ाई करे. वह कहते हैं, “मैं अमरीका द्वारा ईरान पर किसी प्रकार के सैन्य हमले के सख़्त खिलाफ़ हूँ. यह बिल्कुल ग़लत होगा. अगर अमरीका ईरानी युवाओं को राजनीतिक मदद दे तो हम साथ हैं लेकिन किसी प्रकार की फ़ौजी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.” लेकिन ईरान से निपटने के लिए अमरीका इन ईरानी बागियों पर कितना भरोसा करेगा, इनकी कितनी हिमायत लेगा, इस बारे में राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग राय रखते हैं. |
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