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परमाणु हथियार न बनाने का आश्वासन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ जिनेवा में हुई एक अहम बैठक के बाद आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ईरान के साथ बातचीत के बाद किसी समझौते के संकेत तो नज़र नहीं आ रहे हैं मगर ये एक सकारात्मक संकेत है कि बातचीत टूटी नहीं. ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार हसन रोहानी ने कहा है कि "बहुत जल्द ही कोई समझौता हो सकता है लेकिन अंतिम फ़ैसला तेहरान में होगा." ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संकट से निबटने की कोशिश के तहत यूरोपीय संघ ने जुलाई के अंत तक एक प्रस्ताव तैयार करने की पेशकश की है. यूरोपीय देशों ने ईरान को धमकी दी है कि अगर वह परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा तो मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हवाले कर दिया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. उधर ईरान ने परमाणु हथियार का निर्माण न करने की बात तो कही मगर साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया है कि उसे परमाणु ताक़त बनने का पूरा अधिकार है. ईरान धमकी देता रहा है कि वह यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम फिर से शुरू करेगा और माना जाता रहा है कि ये कार्यक्रम ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की ओर ले जा सकता है. गहन चर्चा ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ का कहना है कि बातचीत सफल रही, उन्होंने कहा, "पेरिस समझौता अब भी लागू है और उससे इस बात को सुनिश्चित किया जा सकता है कि ईरान यूरेनियम का संवर्धन और परमाणु ईंधन से जुड़ी सभी प्रक्रिया बंद रखेगा."
इस पूरी बातचीत में ख़ास बात यह है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को फिर शुरू करने की धमकी तो नहीं दी मगर उसने इसे रोकने की गारंटी भी नहीं दी. ईरान ने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मक़सद के लिए है लेकिन अमरीका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने का इरादा रखता है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता तब शुरू हुई जब निर्वासन में रह रहे कुछ विपक्षी ईरानियों ने सार्वजनिक रूप से ये आरोप लगाया कि ईरान नतांज़ में अपने परमाणु संयंत्र में यूरेनियम संवर्धन कर रहा है. उसके बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के निरीक्षकों के एक दल ने ईरान में कई परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में यही कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन कर रहा है. उसके बाद कई वर्षों से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ती ही गई है. |
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