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निरस्त्रीकरण की माँग के बीच परमाणु सम्मेलन शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु अप्रसार संधि के भविष्य पर चर्चा के लिए दुनियाभर के 187 देशों का एक महासम्मेलन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय - न्यूयॉर्क में हो रहा है और इस मौक़े पर परमाणु शक्ति देशों पर निरस्त्रीकरण के लिए माँग भी बढ़ी है. परमाणु हथियार विरोधी देशों और संगठनों का कहना है कि अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और रूस निरस्त्रीकरण के लिए किए गए अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं. एक महीना चलने वाले इस सम्मेलन में ईरान और उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियाँ भी इस सम्मेलन में चर्चा का मुद्दा बनने की संभावना है. हर पाँच साल में होने वाले इस सम्मेलन की शुरूआत सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने की. इस सम्मेलन में 1970 में हुई परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा की जानी है. रविवार को हज़ारों परमाणु हथियार विरोधियों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में बैनरों पर लिखा था, "परमाणु हथियार तुरंत नष्ट करो. बस और हिरोशिमा नहीं चाहिए." ग़ौरतलब है कि 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमरीका ने जापानी शहर हिरोशिमा और नागासाखी पर एटम बम बरसाए थे जिसमें भयंकर तबाही हुई थी. हिरोशिमा के मेयर तदातोशी अकीबा ने कहा, "किसी भी देश को या संगठन को परमाणु हथियारों में काम आने वाली सामग्री का परीक्षण नहीं करना चाहिए." परमाणु अप्रसार पैंतीस वर्ष पुरानी इस संधि का उद्देश्य है परमाणु हथियारों का प्रसार रोकना. किसी भी अन्य निशस्त्रीकरण सहमति के मुक़ाबले इस संधि पर ज़्यादा देशों ने हस्ताक्षर किए हैं लेकिन इस पर मतभेद भी उतने ही हैं.
चार सप्ताह तक चलने वाले इस सम्मेलन के मुख्य मुद्दे को लेकर विवाद पहले ही शुरू हो गया है. अमरीका की मांग है कि उत्तर कोरिया और ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए लेकिन जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, उनकी मांग है कि पाँच परमाणु शक्ति संपन्न देश अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस और चीन ने परमाणु हथियार ख़त्म करने की दिशा में कुछ नहीं किया है. ख़बर है कि सम्मेलन से एक दिन पहले यानी रविवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर में कम दूरी के एक मिसाइल का परीक्षण किया है. विवाद परमाणु अप्रसार संधि के तहत परमाणु हथियार विहीन देश इसे हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे जबकि परमाणु हथियार संपन्न देश हथियार ख़त्म करेंगे.
लेकिन इस सम्मेलन को लेकर अमरीका और उसके सहयोगी देश परमाणु हथियारों के प्रसार को लेकर चिंतित हैं. अमरीका को सबसे ज़्यादा चिंता उत्तर कोरिया को लेकर है जिसने न सिर्फ़ अपने को इस संधि से अलग कर लिया था बल्कि यह भी घोषणा कर दी थी कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. अमरीका की दूसरी चिंता ईरान को लेकर है जिसके बारे में उसका मानना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. हालाँकि ईरान इससे इनकार करता है. दूसरी ओर जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, उन्हें उन पाँच परमाणु शक्ति संपन्न देशों अमरीका, रूस, ब्रिटेन, चीन और फ़्रांस पर आपत्ति है, क्योंकि उन्होंने परमाणु हथियार ख़त्म करने का अपना वादा पूरा नहीं किया है. जबकि तीन अन्य परमाणु हथियार वाले देश- पाकिस्तान, भारत और इसराइल ने इस संधि पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं. |
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