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ईरान व उत्तर कोरिया पर अमरीकी आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र में परमाणु अप्रसार संधि पर चल रहे सम्मेलन में अमरीका ने कहा है कि ईरान और उत्तरी कोरिया ने इस संधि का उल्लंघन किया है. इसलिए इन देशों को परमाणु ऊर्जा के लाभ से वंचित कर दिया जाना चाहिए. सम्मेलन में अमरीकी प्रतिनिधि ने चेतावनी दी है कि संधि को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. महीने भर चलने वाले इस सम्मेलन के पहले दिन अमरीका के सहायक विदेश मंत्री स्टीफ़ेन रेडमेकर ने कहा कि ईरान और उत्तर कोरिया परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इन दोनों देशों को परमाणु अप्रसार संधि के लिए ख़तरा बताया. इससे पहले सम्मेलन की शुरुआत करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि परमाणु हथियारों से एक देश को पैदा होने वाले ख़तरे का मतलब है सभी देशों पर ख़तरा. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि सभी देश एक-दूसरे की सुरक्षा के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझ रहे हैं. इस सम्मेलन में 180 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सम्मेलन में परमाणु हथियार संपन्न देशों और ग़ैर परमाणु संपन्न देशों के बीच मतभेद स्पष्ट दिख रहा है. विवाद संवाददाताओं के अनुसार परमाणु संपन्न देश जहाँ परमाणु अप्रसार के पक्षधर हैं तो ग़ैर परमाणु संपन्न देश चाहते हैं कि परमाणु हथियार वाले देश हथियार ख़त्म करने का अपना वादा पूरा करें.
सम्मेलन में देशों के प्रतिनिधियों ने परमाणु अप्रसार संधि के अंतर्गत हुई प्रगति की तो सराहना की लेकिन इसकी कमज़ोरी का भी उल्लेख किया. अमरीका सम्मेलन में ईरान और उत्तर कोरिया के मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाना चाहता है. दो साल पहले उत्तर कोरिया परमाणु अप्रसार संधि से यह कहते हुए अलग हो गया था कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. हालाँकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं. अमरीकी सहायक विदेश मंत्री स्टीफ़ेन रेडमेकर ने ईरान को भी घेरा. जर्मनी के विदेश मंत्री जोस्का फिशर ने कहा कि परमाणु आतंकवाद सबसे बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है और सभी को ये कोशिश करनी चाहिए कि परमाणु हथियार आतंकवादियों के हाथ न लगें. |
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