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परमाणु सम्मेलन में कोई सहमति नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु अप्रसार पर कई दिनों से चल रहा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन बिना किसी सहमति के ख़त्म हो गया है. परमाणु हथियार का प्रसार रोकने के मुद्दे पर 188 देशों के प्रतिनिधि एकमत नहीं हो पाए. न्यूयॉर्क में क़रीब तीन सप्ताह से इस बात पर बैठक हो रही थी कि कैसे 1970 से लागू परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का दायरा बढ़ाया जाए. परमाणु अप्रसार संधि में परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने के साथ-साथ निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को रोकने की भी बात है. लेकिन ईरान और उत्तर कोरिया में परमाणु कार्यक्रमों पर चिंता के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका. बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि प्रक्रियागत मुश्किलों और राजनीति के कारण सम्मेलन के शुरू से ही अप्रसार संधि की प्रस्तावित समीक्षा नहीं पाई. समझौता मार्कस के अनुसार यह कहना उचित होगा कि इस सम्मेलन में एक मौक़े को गँवा दिया गया. सम्मेलन के आख़िरी दिन बैठक की अध्यक्षता कर रहे ब्राज़ील के सर्जियो द्वार्ते ने कहा कि उन्हें इस बात पर खेद है कि कोई समझौता नहीं हो सका.
परमाणु अप्रसार संधि के तीन महत्वपूर्ण पक्षों पर तीन अलग समितियाँ विचार-विमर्श कर रही थीं. ये पक्ष थे- परमाणु निशस्त्रीकरण, राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रमों की सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल. परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पैरवी करने वालों का कहना था कि अमरीकी प्रतिनिधिमंडल सिर्फ़ परमाणु अप्रसार पर ज़ोर दे रहा था लेकिन अमरीका के उस वादे पर कोई बहस नहीं हो पाई जिसमें उसने कहा था कि वह अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करेगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रतिनिधियों ने दो सप्ताह का समय सिर्फ़ प्रक्रियागत बहसों में गँवा दिया. |
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