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जर्मनी में मतदान, टक्कर काँटे की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मनी में नई सरकार चुनने के लिए मतदान शुरु हो गया है. जर्मनी की दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच काँटे का मुक़ाबला है और दोनो ही इसे देश भविष्य के लिए हो रही लड़ाई की संज्ञा दे रही हैं. ये पार्टियाँ हैं - सत्ताधारी सोशल डेमोक्रेट पार्टी (एसडीपी) और विपक्षी क्रिश्चियन डेमोक्रेट पार्टी (सीडीपी). एसडीपी नेता और वर्तमान चांसलर गेरहार्ड श्रोडर तथा सीडीपी की महिला नेता एंजेला मर्केल पिछले छह सप्ताह में मतदाओं को अपने पक्ष में रिझाने की कोशिश में लगे रहे. अंतिम दौर में हुए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि कुल छह करोड़ मतदाताओं में से आख़िरी क्षणों तक लगभग 25 प्रतिशत वोटर अंतिम फ़ैसला नहीं कर पाए हैं. इसीलिए दोनों प्रतिद्वंदियों ने आख़िरी दौर के चुनाव प्रचार में पूरा दम-ख़म झोंक दिया. गेरहार्ड श्रोडर ने जर्मनी को कल्याणकारी राज्य या वेलफ़ेयर स्टेट बनाए रखने के लिए समर्थन माँगा है. वहीं एंजेला मर्केल ने जर्मनी में विकास की नीची दर और बेरोज़गारी में वृद्धि (उनके अनुसार 50 लाख से ज़्यादा) पर रोकथाम के लिए सुधार के नाम पर वोट माँगा है. अनुमान जनमत संग्रह के नतीजों में यद्यपि एंजेला मर्केल की क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स पार्टी को बढ़त प्राप्त है लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बात की संभावना कम है कि जीतने के बावजूद वे अपनी मर्ज़ी की गठबंधन सरकार बना पाएँगी. इसीलिए उनके जर्मनी की पहिला महिला चांसलर बनने का रास्ता शायद इतना सुगम ना रहे. श्रोडर की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी को भी मुक़ाबले में बहुत नज़दीक बताया जा रहा है. अनुमान लगाया गया है कि किसी भी दल को शायद सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत ना मिले. बर्लिन में बीबीसी संवाददाता रे फ़र्लोंग का कहना है कि ऐसा लगता है कि एंजेला मर्केल की कंज़र्वेटिव पार्टी सबसे मज़बूत अकेली पार्टी के रूप में उभर सकती है. लेकिन अगर एंजेला मर्केल की पार्टी को लिबरल पार्टी - एफ़डीपी के साथ सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो उन्हें श्रोडर की सोशलिस्ट डेमोक्रेट्स (एसपीडी) पार्टी के साथ हाथ मिलाना पड़ सकता है जो नापसंदगी का सौदा होगा. |
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