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सीरिया विरोधी गुट की जीत की उम्मीद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में सीरिया विरोधी गठबंधन के चौथे चरण के चुनाव में जीतने की उम्मीद जताई जा रही है. चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी के बेटे साद अल हरीरी के नेतृत्व वाले सीरिया विरोधी गठबंधन का मुक़ाबला पूर्व सैनिक कमांडर मिशेन आउन के ग्रुप से है. लेबनान में पिछले 30 सालों में पहली बार चुनाव सीरियाई सैनिकों की अनुपस्थिति में हो रहे हैं. पहले ये उम्मीद जताई जा रही थी कि चार चरणों में हुए चुनाव में भी साद हरीरी के गठबंधन को बहुमत मिल जाएगा. लेकिन तीसरे दौर में मिशेल आउट के ग्रुप को मिली असाधारण जीत से सीरिया विरोधी गठबंधन को थोड़ा झटका ज़रूर लगा था लेकिन अभी भी उन्हें उम्मीद है कि बहुमत उन्हें भी मिलेगा. अभी आधिकारिक रूप से पूरे नतीजे जारी नहीं हुए हैं. लेकिन जैसे-जैसे तस्वीर साफ़ हो रही है, उससे दोनों प्रमुख गुट के नेता भी ये बात स्वीकार कर रहे हैं कि उत्तर में साद हरीरी के गठबंधन को सफलता मिल रही है. बहुमत इसलिए माना जा रहा है कि संसद में बहुमत भी इसी गठबंधन को मिलेगा. हरीरी के गठबंधन का दावा है कि चौथे चरण में हुए चुनाव में सभी 28 सीटों पर उन्हें जीत मिलेगी और इस आधार पर उन्हें संसद में बहुमत भी मिल जाएगा.
पूर्व सैनिक कमांडर मिशेल आउन के गठबंधन में शामिल ईसाई नेता सुलेमान फ़्रेंजिए ने माना है कि उनका गठबंधन पिछड़ रहा है. साद हरीरी के ख़ास सहयोगी वालिद जुमब्लात ने कहा है कि चुनाव में मिशेल आउन नाकाम हो गए हैं. साद हरीरी के गठबंधन का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए तो सीरिया द्वारा बनाई गई सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ख़त्म कर देंगे. उनका कहना है कि वे देश में ऐसी व्यवस्था क़ायम करेंगे जो सीरिया के प्रभाव से मुक्त रहेगी. बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का मानना है कि मिशेल आउन ने भी तीसरे दौर में ज़बरदस्त सफलता हासिल की थी और उनके विचारों को किनारे करना मुश्किल होगा. |
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