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'लेबनान में सीरिया समर्थकों की जीत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में सीरिया समर्थक पार्टियों का कहना है कि उन्होंने देश में हुए संसदीय चुनाव के दूसरे दौर में विजय पाई है. देश के दक्षिणी हिस्से में हुए चुनाव में हिज़बुल्ला और अमल नाम की पार्टियों ने मिलकर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उनका कहना है कि प्रारंभिक नतीजे बताते हैं कि उन्होंने सभी 23 सीटें जीत ली हैं जहाँ कि मतदान हुआ था. लेबनान में चार चरणों में हो रहे संसदीय चुनाव इस मायने में ऐतिहासिक बताए जा रहे हैं कि वहाँ पिछले 30 वर्षों में पहली बार सीरियाई सेना की अनुपस्थिति में चुनाव हो रहे हैं. वैसे चुनाव के आधिकारिक परिणाम की घोषणा सोमवार को की जाएगी. लेबनान में पिछले रविवार को, राजधानी बेरूत में 19 सीटों पर चुनाव हुए थे जिसमें सीरिया विरोधी उम्मीदवारों को जीत मिली थी. सीरिया समर्थक बेरूत में बीबीसी के संवाददाता किम घटास का कहना है कि सीरियाई सैनिक पिछले अप्रैल में लेबनान से चले ज़रूर गए लेकिन सीरिया समर्थक गुट अभी भी लेबनान की राजनीति में प्रभाव रखते हैं. सन 2000 में लेबनान के दक्षिणी हिस्से से 22 साल के बाद इसराइली सैनिकों को हटना पड़ा था और इसका श्रेय हिज़बुल्ला को दिया जाता है. लेबनान में अभी भी हिज़बुल्ला के 20 हज़ार हथियारबंद सदस्य हैं जो एक विवादित सीमा से इसराइली सैनिकों को पीछे हटाने के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन हिज़बुल्ला पर हिंसा त्यागने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है और हिज़बुल्ला को उम्मीद है कि चुनाव में बढ़िया प्रदर्शन से उसे ये कहने का अवसर मिलेगा कि लोग उनकी नीतियों में विश्वास रखते हैं. हालाँकि रविवार को दूसरे दौर के चुनाव में ईसाई और सुन्नी समुदाय के कई लोग मतदान केंद्रों से दूर ही रहे. |
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