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सीरिया ने सैनिक हटाने की पुष्टि की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र को पुष्टि की है कि वह लेबनान से अपने सभी सैनिक में प्रस्तावित संसदीय चुनावों से पहले हटा लेगा. सीरिया के विदेश मंत्री फ़ारूक़ अल शारा ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे एक पत्र में यह पुष्टि की है. ग़ौरतलब है कि सीरिया ने पहले से ही अपने सैनिक हटाने शुरू कर दिए हैं. इसी साल 14 फ़रवरी को लेबनान में हुए एक विस्फोट में पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की मौत के बाद सीरिया के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि हरीरी की हत्या में सीरिया का हाथ है लेकिन सीरिया ने इन आरोपों का खंडन किया था. लेकिन इसी के साथ सीरिया पर लेबनान से अपने सैनिक हटाने के लिए दबाव बढ़ने लगा था. लेबनान में सीरिया के क़रीब चालीस हज़ार सैनिक ते लेकिन गत सोमवार को उनकी संख्या घटकर आठ हज़ार रह गई. बाक़ी सैनिक पिछले कुछ दिनों में लेबनान से हट चुके हैं. पिछले साल सितंबर में अमरीकी और फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें लेबनान से सीरिया के सैनिक और ख़ुफ़िया सेवा के अधिकारी पूरी तरह हटाने का आहवान किया गया था. संवाददाताओं का कहना है कि सीरिया लेबनान से अपने सैनिक इतनी जल्दी हटा लेगा, इसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी लेकिन हरीरी की हत्या ने सारा मामला ही बदल दिया. हालाँकि लेबनान में सीरियाई सैनिकों की मौजूदगी के समर्थन में भी कुछ प्रदर्शन हुए थे. लेबनान में सीरियाई समर्थक सरकार के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए तो उस सरकार को हटना पड़ा था. प्रधानमंत्री उमर करामी ने हरीरी की हत्या के क़रीब एक पखवाड़ा बाद इस्तीफ़ा दे दिया था लेकिन राष्ट्रपति एमाइल लाहौद ने उन्हें दस मार्च को बहाल कर दिया था. लेकिन उमर करामी ने यह कहते हुए फिर से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की है कि वह एक राष्ट्रीय एकता वाली सरकार का गठन करने में नाकाम रहे हैं. |
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