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सीरिया के समर्थन में हिज़्बुल्ला का प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज़्बुल्ला के हज़ारो समर्थक सीरिया के पक्ष में प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए हैं. सीरिया ने लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण लेबनॉन से अपने सैनिकों की वापसी शुरू कर दी है. चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्ला सीरिया पर अंतरराष्ट्रीय दबाव का विरोध कर रहा है. हिज़्बुल्ला के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उनका प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय दख़ल को लेकर है. हिज़्बुल्ला की इस रैली से कुछ ही दूर लेबनान के विपक्षी पार्टियों की भी रैली हो रही है जो लेबनॉन से सीरियाई सैनिकों की पूरी तरह वापसी चाहते हैं. दूसरी ओर लेबनान में मौजूद सीरिया के सैनिकों ने पीछे हटने की योजना के तहत बेका घाटी की तरफ जाना शुरु कर दिया है. सीरिया और लेबनान के राष्ट्राध्यक्षों की सोमवार को दमिश्क में बैठक हुई थी जिसमें सीरियाई सैनिकों की बेका घाटी में पुनर्तैनाती का फैसला किया गया था. अमरीका ने सीरियाई सैनिकों के पीछे हटने के इस फेसले का विरोध किया है और कहा है कि ये आधा अधूरा कदम है. अमरीका की मांग है कि सीरिया लेबनान से अपने सभी सैनिकों और गुप्तचर अधिकारियों को वापस बुलाए. शिया मुस्लिमों के चरमपंथी गुट हिजबुल्ला बेरुत में प्रदर्शन कर रहा है. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार सुबह में काले कपड़े पहने हुए लोगों ने शहर के मुख्य चौराहे पर प्रदर्शन किया और वो लाउडस्पीकरों पर कह रहे थे शुक्रिया सीरिया और विदेशी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे. हिज़बुल्ला हमेशा से सीरिया के सैनिकों और उनकी लेबनान में मौजूदगी का समर्थन करता रहा है क्योंकि ये दोनों एक दूसरे की मदद से इसराइल की उत्तरी सीमा पर दबाव बनाए रखते थे. हिज़बुल्ला का कहना है कि वह सीरिया का समर्थन करता है और लेबनान में किसी भी पश्चिमी देश का हस्तक्षेप उसे स्वीकार नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर सीरिया के सैनिक पूरी तरह लेबनान से हट जाते हैं तो वहां अराजक स्थिति पैदा हो जाएगी. सीरिया की सेनाएं 1976 में उस समय लेबनान आई थीं जब लेबनान में गृह युद्ध चल रहा था. वापसी की तारीख तय नहीं सीरिया की सेनाएं पीछे तो हट रही हैं लेकिन उनके लेबनान से पूर्ण रुप से हटने की कोई तारीख तय नहीं हुई है. कम से कम 15 सैनिक ट्रकों को सैन्य साजो सामान के साथ बेका घाटी की तरफ जाते हुए देखा गया है. इन ट्रकों का कई प्रदर्शनकारियों ने ज़ोरदार स्वागत किया. सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद और लेबनान के राष्ट्रपति एमिल लाहूद की बैठक में ये तय हुआ था कि 5000 सीरियाई सैनिक बेरुत से बाहर आ जाएंगे लेकिन लेबनान में ही रहेंगे. दोनों नेताओं ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि सीरिया की सेनाएं कब पूरी तरह लेबनान से हट जाएंगी.
फिलहाल सीरिया सैनिकों के पीछे हटने की घोषणा भी लगातार जारी अंतरराष्ट्रीय दबाव और लेबनानी नागरिकों के प्रदर्शन के कारण की गई है. अमरीका दोनो पक्षों के इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं है. अमरीका का कहना है कि सीरियाई सैनिकों की वापसी पर तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए. अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय के एक प्रवक्ता का कहना है कि सीरिया की योजना में आधे-अधूरे कदम सुझाए गए हैं. ये भी कहा गया है कि इससे न तो लेबनान की माँग पुरी होगी और न ही अंतरराष्ट्रीय संमुदाय की. अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सीरिया के 14 हज़ार सैनिकों और गुप्तचर विभाग के अधिकारियों को तत्काल लेबनान से हटाए जाने की माँग दोहराई है. फ़्रांस और जर्मनी ने भी ऐसी ही माँग रखी है. लेबनान की राजनीति बेरूत में हज़ारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने फिर प्रदर्शन कर माँग रखी है कि सीरिया लेबनान के मामलों में दख़ल बंद करे. उधर लेबनान के विपक्षी नेताओं ने कहा है कि लेबनान में मई में होने वाले चुनाव से पहले ये आवश्यक है कि सीरियाई सैनिक पूरी तरह से लेबनान से वापस चले जाएँ. वहीं लेबनान में सीरिया समर्थक हिज़्बुल्ला छापामारों ने सीरिया के फ़ौज हटाने की घोषणा को लेबनान में विदेशी हस्तक्षेप बताते हुए इसकी आलोचना की है. |
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