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लेबनान की सीमा पार तक होगा असर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या का असर वहाँ तो दिखेगा ही मगर ये भी आशंका है कि इसका असर उसकी सीमाओं को पार भी करेगा. दरअसल हरीरी लेबनान में सीरिया की सेना की मौजूदगी के कट्टर विरोधी थे. लेबनान के संसदीय चुनाव होने वाले हैं और माना जा रहा था कि उनके सुन्नी समर्थक इन चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं. ये सुन्नी मतदाता देश भर के मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं. इसके अलावा मध्य पूर्व में लोकतंत्र लाने के अपने संकल्प के तहत लेबनान के लिए बुश प्रशासन काफ़ी हद तक हरीरी पर ही निर्भर था. अभी ये तो कहना लगभग नामुमकिन ही है कि इस हत्या के लिए कौन ज़िम्मेदार है मगर बुश प्रशासन लगातार ये संकेत दे रहा है कि इसमें सीरिया का हाथ हो सकता है. बढ़ता दबाव अब लग रहा है कि अमरीका सीरिया पर इस बात का दबाव बढ़ाएगा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को लागू करते हुए लेबनान से अपनी सेना पूरी तरह हटा ले.
विदेश नीति का ये एक ऐसा हिस्सा है जिस पर अमरीका और फ़्रांस दोनों ही पूरी तरह सहमत हैं. अब अगर यूरोप और अमरीका कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाना तय कर लें तो सीरिया पर लेबनान से सेना हटाने के लिए ज़बरदस्त दबाव हो जाएगा. बुश प्रशासन सीरिया से ख़ास तौर पर इस बात के लिए भी नाराज़ है कि वह इराक़ में चरमपंथियों को सीमा पार करने से रोकने में विफल रहा है. इस बीच सीरिया लगातार ख़ुद को अलग थलग महसूस करने लगा है क्योंकि व्यापक मध्य पूर्व में वह शामिल नहीं हो सका. इधर सीरिया के लेबनान से काफ़ी कूटनीतिक हित जुड़े हैं और हरीरी की हत्या में उसका हाथ हो या नहीं मगर जैसा कि एक अमरीकी अधिकारी ने कहा कि सीरिया को इसका असर तो झेलना ही होगा. |
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