| करामी से प्रधानमंत्री पद संभालने को कहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में विपक्ष के दबाव में अपने पद से दस दिन पहले इस्तीफ़ा दे चुके उमर करामी को फिर प्रधानमंत्री पद संभालने को कहा गया है. लेबनान के राष्ट्रपति एमील लाहूद ने उन्हें ये पद दोबारा संभालने के लिए कहा है. उमर करामी ने विपक्ष से अपील की है कि सभी दल राष्ट्रीय सरकार बनाने में उन्हें सहयोग दें. लेबनानी संसद के अधिकतर सदस्यों ने उमर करामी को देबारा प्रधानमंत्री बनाए जाने का समर्थन किया है. उमर करामी ने अपने पद से तब इस्तीफ़ा दिया था जब लगातार कई दिन राजधानी बेरूत में सीरिया के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे. पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की एक कार बम धमाके में मौत के बाद बेरूत में विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. विपक्ष ने हरीरी की मौत के पीछे लेबनान के अधिकारियों और सीरिया का हाथ होने का आरोप लगाया था. विपक्ष का रवैया उमर करामी का कहना है कि केवल राष्ट्रीय सरकार बनाकर ही लेबनान की समस्याओं से निपटा जा सकता है. फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि विपक्ष उनके निमंत्रण पर क्या रुख़ अपना है. बीबीसी संवाददाता एलिक्स क्रूगर के अनुसार मुद्दा लेबनान में सीरिया की भूमिका का है जिसने लेबनान में सत्ता पर अपना प्रभाव बनाया हुआ है. उमर करामी तो सीरिया समर्थक हैं लेकिन लेबनान की जनता का मत इस मुद्दे पर विभाजित है. बेरूत में सिरिया के ख़िलाफ़ और उसके समर्थन में रैलियाँ हुई हैं. बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि ऐसा लगता है कि विपक्ष सरकार में शामिल नहीं होगा. विपक्ष ने प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार तो नहीं दिया था लेकिन उमर करामी को दोबारा न्योता दिए जाने को उसने 'जनता को एक चुनौती' के रूप में प्रस्तुत किया है.
सरकार में भाग लेने के लिए विपक्ष कई शर्तें रख सकता है जिनमें सुरक्षा सेवाओं के अध्यक्षों का इस्तीफ़ा मुख्य माँग होगी. समर्थन राष्ट्रपति को नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति से पहले सांसदों से बातचीत करनी पड़ती है. राष्ट्रपति ने 78 सांसदों के साथ विचार-विमर्थ किया जिनमें से 69 ने करामी का समर्थन किया. विपक्ष के 40 संसद सदस्य हैं लेकिन इन्होंने राष्ट्रपति के साथ न तो सलाह की और न किसी उम्मीदवार को ही आगे किया. विपक्ष ने अपने दो सांसदों को राष्ट्रपति से मिलने ज़रूर भेजा और उन्होंने अपनी मांगों की सूची सामने रखी. विपक्ष की मांग थी कि लेबनान से सीरियाई सैनिकों को पूरी तरह वापस बुलाया जाए. लेकिन राष्ट्रपति लाहूद ने विपक्ष के मांगपत्र को स्वीकार तक नहीं किया. |
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