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रविवार, 29 मई, 2005 को 23:28 GMT तक के समाचार
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हरीरी की पार्टी का जीत का दावा
साद हरीरी
साद हरीरी मतदान के कम प्रतिशत से चिंतित हैं
लेबनान के आम चुनाव के पहले चरण में पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी के बेटे साद हरीरी की पार्टी ने जीत हासिल करने का दावा किया है.

लेकिन सीरिया के विरोधी माने जाने वाले साद हरीरी को शायद इस बात की चिंता हो कि इस चुनाव में सिर्फ़ 28% मतदाताओं ने ही वोट डाले.

हाल ही में सीरिया के लेबनान से अपनी सेना हटा लेने के बाद लेबनॉन में ये पहला चुनाव हो रहा है.

लेबनान की राजधानी बेरूत में वोट डालने के 3 घंटे के अंदर ही साद हरीरी के समर्थक सड़कों पर इकट्ठा हो गए और ज़ोरदार नारों के साथ ख़ुशियाँ मनाने लगे.

लेकिन ये भी सच है कि इन चुनावों में साद हरीरी की जीत पहले से तय मानी जा रही थी.

उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे कुछ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिये थे जिसके बाद 19 में से 9 सीटों पर हरीरी की पार्टी के लोग निर्विरोध जीत गए थे.

अब साद हरीरी के समर्थक दावा कर रहे हैं कि बेरूत और उसके आसपास के इलाक़ों की सभी 19 सीटें उन्होंने जीत ली हैं.

दबाव

साद हरीरी के पिता पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक अल हरीरी की हत्या हो गई थी जिसके बाद लेबनान में कई सीरिया विरोधी प्रदर्शन हुए थे. इसके कारण और अमरीका के दबाव के बाद सीरिया ने अपने सैनिक लेबनान से हटा लिए थे.

 मैं अपनी पार्टी को उदारवादी पार्टी बनाए रखना चाहता हूँ – हमारी पार्टी सबकी पार्टी होगी, और हमारी पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी होगी
साद हरीरी

इस पहले चरण के चुनाव के बाद साद अल हरीरी ने कहा, "मैं अपनी पार्टी को उदारवादी पार्टी बनाए रखना चाहता हूँ – हमारी पार्टी सबकी पार्टी होगी, और हमारी पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी होगी."

रफ़ीक अल हरीरी ने ये भी कहा कि उनकी पार्टी सभी धर्मों और विचारों के लोगों को साथ लेकर चलेगी.

एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि सीरिया के प्रभाव में जो पिछले चुनाव हुए थे उनमें जितने लोगों ने वोट डाले हैं उसके मुकाबले इस बार कम लोगों ने वोट डाले हैं.

ये चुनाव चार चरणों के चुनाव के पहले चरण के चुनाव थे. कुल 128 सीटों में से 19 सीटें आज साद अल हरीरी की पार्टी ने जीत ली है और ये भी माना जा रहा है कि आख़िरकार उनकी ही पार्टी लेबनॉन की संसद में आएगी.

लेकिन अगले रविवार के चुनाव में नज़रें होंगी दक्षिणी लेबनान की ओर जहाँ सीरिया समर्थक इलाक़ों में चुनाव होने हैं. ये वो इलाक़े हैं जहाँ सीरिया समर्थक संगठन हिज़्बुल्ला और शिया संगठन अमाल का काफ़ी प्रभाव है.

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