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मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को 13:31 GMT तक के समाचार
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सैनिकों की वापसी के दावे की जाँच
लेबनान से वापस होते सीरियाई सैनिक
इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या सारे सीरियाई सैनिक वापस हो चुके हैं
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान के अनुसार अभी निश्चयपूर्वक यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि सीरिया ने लेबनान से अपने सारे सैनिक निकाल लिए हैं.

सुरक्षा परिषद को अपनी रिपोर्ट में अन्नान ने कहा है कि उन्हें सैनिकों की पूर्ण वापसी के दावे वाली सीरिया की चिट्ठी मिली है और संयुक्त राष्ट्र का एक दल इसकी जाँच कर रहा है.

सुरक्षा परिषद में अन्नान की रिपोर्ट पर इसी सप्ताह बहस होगी.

सीरिया ने क़रीब 29 साल के बाद मंगलवार, 26 अप्रैल 2005 को लेबनान से अपने सैनिक पूरी तरह हटाने की कार्रवाई पूरी करने की घोषणा की थी.

मंगलवार को क़रीब 200 सीरियाई सैनिक विदाई समारोह के लिए बेका वादी में जमा हुए और वहाँ से स्वदेश के लिए रवाना हो गए.

सैनिकों को पदक दिए गए और उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थन में नारे लगाए. साथ ही मार्च पास्ट किया. इस मौक़े पर लेबनानी सेना की धुन भी बजाई गई.

लेबनान में एक समय में सीरिया के सैनिकों की संख्या चालीस हज़ार तक पहुँच गई थी. सीरियाई सैनिकों को लेबनान से इसी साल अप्रैल तक पूरी तरह से हटने का कार्यक्रम तय किया गया था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1559 में व्यवस्था की गई थी कि लेबनान से सभी विदेशी सैनिक हट जाएं.

सैनिकों की तैनाती

सीरियाई सैनिक 1976 में लेबनान में गए थे, तब वहाँ गृहयुद्ध हो रहा था. फ़रवरी 2005 में लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या के बाद लेबनान से सीरियाई सैनिक हटाए जाने के लिए दबाव बढ़ा था.

लेबनान में सीरियाई सैनिक
लेबनान से विदाई हुई

रफ़ीक हरीरी की मौत एक कार बम धमाके में हुई थी.

लेबनान में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि हरीरी की हत्या में सीरिया का हाथ था जबकि सीरिया ने इन आरोपों को ग़लत बताया था.

हरीरी की मौत के बाद लेबनान में सीरिया के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होने लगे थे.

लेबनान की राजधानी बेरूत में बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि सीरियाई सैनिक लेबनान में गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद भी काफ़ी लंबे समय तक टिके रहे और सीरिया एक तरह से लेबनान में राजनीतिक कर्ताधर्ता बन गया था.

लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती का कहना है कि सैनिकों की वापसी के साथ ही "दो पड़ोसी देशों के बीच एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हुई है."

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