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जर्मन चांसलर श्रोएडर विश्वास मत हारे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर संसद में विश्वास मत हार गए हैं और अब संसद को जल्दी भंग करने और नए चुनाव कराने का रास्ता साफ़ हो गया है. श्रोएडर वैसे यही चाहते थे और उन्होंने सांसदों से इसका अनुरोध किया था. संसद के निचले सदन में 151 सांसदों ने सरकार का समर्थन किया, 296 ने उसके ख़िलाफ़ मतदान किया और 148 मतदान से बाहर रहे. इससे पहले श्रोएडर ने सांसदों से यह कहते हुए मतदान की अपील की थी कि एक नए जनादेश के बिना उनके राजनीतिक कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ सकते हैं. उनकी सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी को मई में एक प्रमुख राज्य के चुनाव में हार का मुँह देखना पड़ा था. श्रोएडर का कहना है कि समय से एक साल पूर्व चुनाव कराना इसलिए ज़रूरी है कि क्योंकि उन्हें अपने कड़े आर्थिक सुधारों के लिए जनादेश चाहिए.
शीघ्र चुनाव को राष्ट्रपति का अनुमोदन चाहिए और इसके बाद यह भी हो सकता है कि सत्ता अधिक लोकप्रिय रूढ़िवादी क्रिश्चियन डेमोक्रैट्स यानी सीडीयू के हाथों में चली जाए. सीडीयू नेता एंजेला मर्केल ने संसद में कहा कि श्रोएडर का एसपीडी-ग्रीन गठबंधन अब और अधिक शासन चलाने में असमर्थ है. फ़ैसला राष्ट्रपति के हाथ अब राष्ट्रपति कोएहलर को तय करना है कि क्या जल्दी चुनाव कराने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं. सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जर्मनी के 70 प्रतिशत लोग जल्दी चुनाव चाहते हैं. लेकिन कुछ विशेषज्ञ इस बारे में सवाल उठा रहे हैं कि चांसलर श्रोएडर का क़दम सांविधानिक भी है या नहीं. उनकी अपनी पार्टी और गठबंधन के कई सांसद इस क़दम का विरोध कर रहे हैं. लेकिन, जैसाकि एक बीबीसी संवाददाता का कहना है, श्रोएडर की सरकार जर्मनी के ख़राब आर्थिक प्रदर्शन और अलोकप्रिय सुधार कार्यक्रमों की वजह से देश में अपना काफ़ी समर्थन खो चुकी है. इस सबसे भी ज़्यादा मतदाता देश में बढ़ती हुई बेरोज़गारी की दर नीचे लाने में सरकार की असमर्थता से क्षुब्ध हैं. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक देश में 47 लाख लोग यानी कुल जनसंख्या का 11.3 फ़ीसदी बेरोज़गार हैं. |
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