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'संविधान की पुष्टि की प्रक्रिया जारी रखें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस और जर्मनी ने कहा है कि फ़्रांस और नीदरलैंड में यूरोपीय संविधान को नकार दिए जाने के बावजूद संविधान की पुष्टि की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए और इस पर सोच-विचार होना चाहिए. फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ज़्याक शिराक और जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर ने पेरिस में यूरोपीय संघ के नेताओं की बातचीत के बाद ऐसा कहा है. उधर यूरोपीय संघ के चार नए सदस्यों - चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया ने भी अनुरोध किया है कि संविधान की पुष्टि की प्रक्रिया जारी रखी जाए. स्लोवाकिया और हंगरी की संसदों ने पहले ही यूरोपीय संघ के संविधान की पुष्टि कर दी है लेकिन पोलैंड और चेक गणराज्य में संविधान का काफ़ी विरोध हो रहा है. पोलैंड में अक्तूबर में जनमत संग्रह होना है और चेक गणराज्य की संसद में अगले हफ़्ते जनमत संग्रह करवाने पर बहस होगी. पेरिस में हुई बैठक के बाद, राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने ब्रिटेन से अनुरोध किया कि वह उसे दी जाने वाली बजट में छूट पर उदार रुख़ अपनाए. लेकिन ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने लंदन में कहा कि वे पूरे यूरोपीय बजट पर पुनर्विचार के लिए तैयार हैं लेकिन वे केवल ब्रिटेन को बजट में मिलने वाली छूट पर बात नहीं करेंगे. उनका कहना था कि अब भी ब्रिटेन यूरोपीय संघ के बजट में फ़्रांस से ज़्यादा योगदान देता है चाहे यूरोपीय संघ की साझा कृषि नीति से फ़्रांस के किसानों को भारी रियायतें भी मिलती हैं. |
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