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नीदरलैंड में आज जनमत संग्रह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस के बाद अब नीदरलैंड में यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान पर जनमत संग्रह आज होने वाला है. सरकार ने संविधान के पक्ष में प्रचार करते हुए लोगों से इसका समर्थन करने की अपील की है लेकिन जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार लोग इसका विरोध करने वाले हैं. फ्रांस में पिछले सप्ताह लोगों ने संविधान को ख़ारिज कर दिया था जिसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने जां पीटर बालकेनेंडे ने कहा कि यूरोपीय संविधान से यूरोप में और खुलापन आएगा और पारदर्शिता बढ़ेगी. उन्होंने इन दावों को ग़लत करार दिया कि नए संविधान से यूरोपीय संघ में नीदरलैंड का प्रभाव कम हो जाएगा. हालांकि जनमत संग्रह में कहा जा रहा है कि देश के क़रीब 60 प्रतिशत लोग संविधान के ख़िलाफ़ मतदान करने वाले हैं. कई लोगों की शिकायत है कि दूसरे देशों के लोग भारी संख्या में आकर नीदरलैंड में बस रहे हैं जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. नीदरलैंड में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोगों को यह भी डर है कि यूरोपीय संविधान स्वीकार करने से देश के कई उदारवादी क़ानूनों को बदलना पड़ेगा.
नीदरलैंड में कुछ मादक द्रव्यों के सेवन पर कार्रवाई नहीं होती तथा समलैंगिक विवाह भी सामान्य हैं जो कि यूरोप के अन्य देशों में नहीं होते. अगर नीदरलैंड के लोग भी संविधान के लिए ना कर देते हैं तो ये न केवल सरकार के लिए बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी झटका होगा क्योंकि अस्सी प्रतिशत से अधिक सांसद इसके पक्ष में हैं. शायद यही कारण है कि सरकार ने लोगों को यह बताने की पूरी कोशिश की है कि ना कहने के क्या घातक परिणाम हो सकते हैं लेकिन लगता नहीं कि लोगों पर इसका कोई ख़ास प्रभाव पड़ा है. लोगों में इस बात को लेकर आम राय है कि यूरोपीय संघ का विस्तार उनके लिए नुकसानदेह होगा. हालांकि शुरुआत में नीदरलैंड के लोग यूरोपीय संघ को लेकर काफी उत्साहित थे लेकिन अब वैसी बात दिखाई नहीं पड़ती है. |
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