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फ्रांस में जनमतसंग्रह के लिए उल्टी गिनती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में यूरोपीय संविधान पर रविवार को होने वाले जनमतसंग्रह के लिए राजनीतिक दल आख़िरी दौर की रैलियाँ कर रहे हैं. ताज़ा सर्वेक्षणों में सुझाव दिया गया है कि फ्रांस के 55 प्रतिशत लोग यूरोपीय संविधान के ख़िलाफ़ राय देने वाले हैं. यूरोपीय संविधान के पक्ष में राय रखने वाले लोगों का कहना है कि इसके लागू होने से यूरोपीय संघ में फ्रांस की ताक़त बढ़ेगी, देश का सामाजिक ढाँचा संरक्षित होगा और और यूरोपीय संघ के संस्थानों में सुधार होगा. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यूरोपीय संविधान बहुत उदार है इससे नौकरियाँ, वेतन और रहन-सहन के हालात सुरक्षित रखने की फ्रांस की योग्यता पर आँच आएगी. इससे पहले फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति और यूरोपीय संविधान लिखने वालों में शामिल रहे वैलरी जिशार्ड ने आख़िरी भावनात्मक अपील की कि फ्रांस के लोग इस संविधान को नहीं ठुकराएँ. अभियान के आख़िरी दिन यूरोपिय संविधान समर्थकों में उदासीनता का मौहाल है और फ्रांसीसी अख़बारों में भी एलीज़े पैलेस में उदासीन माहौल का ही ज़िक्र है. सर्वक्षणों के मुताबिक रविवार को होने वाले जनमतसंग्रह के मसले पर फ्रांस के लोग बटे हुए नज़र आ रहे हैं. राजनैतिक हल्का एक तरफ़ है तो व्यापार यूनियन और मज़दूर दूसरी तरफ. कई फ्रांसीसी लोगों का मानना है कि यूरोपीय संविधान लागू होने के बाद पूर्वी यूरोपिय देश फ्रांस के मुक़ाबले ज़्यादा फ़ायदे में रहेंगे. इसकी वजह से नौकरियों को लेकर आपसी होड़ बढ़ेगी और फ्रांस में बेरोज़गारों की संख्या में बढ़ोतरी होगी. भावनात्मक अपीलें इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति शिराक ने टेलीविज़न पर दिए भाषण में लोगों से संविधान के समर्थन में मत डालने की अपील की. उन्होंने कहा कि इससे पक्ष में मत डालना फ्रांस के हित में है.
उनके इस भाषण को लोगों का समर्थन जुटाने की आख़िरी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन अभियान के आख़िरी दिन लोगों का समर्थन जुटाने की बारी विपक्षी समाजवादियों की है- यह बताने के लिए कि फ्रांस के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है और राष्ट्रपति शिराक के प्रति अपना विरोध जताने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं है. वैसे इस जनमतसंग्रह ने इन पार्टियों में राजनीतिक विरोधियों को ज़रुर एक साथ खड़ा कर दिया है. इससे पहले जर्मनी यूरोपिय संविधान को मंज़ूरी दे चुका है. जर्मन संसद में पंद्रह राज्यों ने इसके पक्ष में वोट दिया जबकि एक राज्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया. जर्मनी के इस नतीजे से किसी को हैरत नहीं हुई है. इस मतदान को जानबूझकर फ्रांस के जनमतसंग्रह से ठीक पहले करवाया गया है ताकि समर्थकों का उत्साह बढ़ सके. |
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