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यूरोपीय संविधान के पक्ष में वोट दें: शिराक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने टेलीविज़न पर दिए अपने संदेश में मतदाताओं से अपील की है कि वे 29 मई को यूरोपीय संघ के संविधान पर हो रहे जनमतसंग्रह के पक्ष में वोट दें. पिछले कुछ महीनों के दौरान हुए कई सर्वेक्षणों में बताया गया है कि फ़्रांसीसी यूरोपीय संघ के संविधान के ख़िलाफ़ मतदान करेंगे. लेकिन हाल के दिनों में संविधान के समर्थकों के अभियान में तेज़ी आई है. फ़्रांसीसी सरकार का कहना है कि उसे अब नए जनमत सर्वेक्षण का इंतज़ार है ताकि उन्हें अंदाज़ा हो सके कि राष्ट्रपति शिराक की अपील का कितना असर पड़ा है. टीवी पर दिए अपने स्पष्ट संदेश में शिराक ने कहा कि कोई भी सच्चा यूरोपीय इस संविधान के विपक्ष में मतदान नहीं कर सकता. उन्होंने दावा किया कि फ़्रांसीसियों के लिए यह बेहतरीन संविधान साबित होगा जो फ़्रांसीसी मूल्यों और इसके सामाजिक ढाँचे से प्रभावित है. आलोचना यूरोपीय संविधान के आलोचकों का कहना है कि इसमें कामगारों की सुरक्षा का ख़्याल नहीं रखा गया है. इसका जवाब देते हुए राष्ट्रपति शिराक ने कहा कि ये सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि इस संविधान में मुक्त व्यापार क्षेत्र जैसा कुछ नहीं है जैसा कुछ देश चाहते हैं. राष्ट्रपति शिराक ने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि यूरोप के संस्थापक देशों का इसमें पहले के मुक़ाबले ज़्यादा प्रभाव है. उन्होंने कहा कि इसका सवाल ही नहीं उठता की फ़्रांस अपनी संप्रभुता को दाव पर लगा दे. राष्ट्रपति शिराक ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर देश की जनता संविधान के ख़िलाफ़ भी मतदान करती है, तो वे अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देंगे. हालाँकि उन्हें इसकी उम्मीद है कि जनमतसंग्रह के लिए जो मतदाता अनिर्णय की स्थिति में थे, वे उन्हें अपनी ओर खींचने में सफल होंगे. देश के वरिष्ठ और महत्वपूर्ण राजनेता संविधान के पक्ष में मतदान का समर्थन कर रहे हैं. लेकिन अभी भी उन्हें काफ़ी कुछ करना है क्योंकि क़रीब 25 प्रतिशत मतदाताओं ने अपना मन नहीं बनाया है. यूरोपीय संविधान उसी समय अस्तित्व में आएगा जब सभी सदस्य देश इसकी पुष्टि कर देंगे. हालाँकि कई देश अपने यहाँ जनमतसंग्रह आयोजित नहीं कर रहे हैं. |
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