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फ़्रांस ने यूरोपीय संविधान को नकारा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस की जनता ने यूरोपीय संघ के संविधान को नकार दिया है. रविवार को हुए जनमतसंग्रह में क़रीब 55 प्रतिशत लोगों ने संविधान के विरोध में मत डाला. आधिकारिक नतीजों के अनुसार संविधान के ख़िलाफ़ 54.87 फ़ीसदी मत पड़े जबकि संविधान के पक्ष में 45.13 फ़ीसदी मत पड़े. रविवार को हुए जनमतसंग्रह में फ़्रांस की 70 प्रतिशत जनता ने हिस्सा लिया. यूरोपीय संविधान उसी समय लागू होगा जब सभी सदस्य देश इसकी पुष्टि कर देंगे. नौ देशों ने पहले ही इस संविधान को मंज़ूरी दे दी है. यह परिणाम राष्ट्रपति ज़्याक शिराक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वह इसके समर्थन में प्रचार कर रहे थे. संविधान के ख़िलाफ़ नतीजे को भाँपते हुए राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि वे मतदाताओं के फ़ैसले को स्वीकार करते हैं लेकिन फ़्रांस यूरोपीय संघ के प्रति अपनी वचनबद्धता का सम्मान करेगा. शिराक ने कहा, "आपने यूरोपीय संविधान को नकार दिया है. यह आपका फ़ैसला है. यूरोपीय संघ के संस्थापक देशों में से एक फ्रांस का यह फ़ैसला निश्चित रुप से यूरोप में हमारे हितों की रक्षा में थोड़ी मुश्किल ज़रुर खड़ी कर देगा." प्रतिक्रिया जानकारों का कहना है कि ये परिणाम किसी राजनीतिक भूचाल की तरह है जिसके झटके पूरे यूरोप में महसूस किए जाएंगे. यूरोपीय संघ के संस्थापक देशों में से एक में इसके संविधान को लेकर नहीं के पक्ष में दिया गया वोट पूरे यूरोपीय संघ के भविष्य को खतरे में डाल सकता है. विदेश मंत्री मिशेल बार्निए ने इस पर निराशा जताई है जबकि फ़्रांस के रक्षा मंत्री मिशेल एलियट मेरी ने नतीजे को फ़्रांस और यूरोप की हार बताया है. संभवत: इसीलिए यूरोपीय संसद के वर्तमान अध्यक्ष जोसेफ बोरेल ने प्रतिक्रिया कुछ यूं दी. उन्होंने कहा, "हमें ये देखना होगा कि अन्य देशों में क्या हो रहा है. फ्रांस में नहीं वोट आना महत्वपूर्ण है लेकिन मुझे लगता है कि इस दिशा में काम करना होगा और जानना होगा कि अन्य देशों की राय क्या और कैसी है. हो सकता है अगले साल के अंत तक स्थिति बदल जाए." फ़्रांस से पहले स्पेन में भी इस मामले पर जनमतसंग्रह हुआ था जिसमें देश की जनता ने संविधान के पक्ष में वोट दिया था. जिसके बाद स्पेन की संसद के दोनों सदनों ने भी इसे मंज़ूरी दे दी थी. जर्मनी ने शुक्रवार को संसद में हुए मतदान के बाद संविधान को मंज़ूरी दी. फ़्रांस के बाद बुधवार को नीदरलैंड में भी जनमतसंग्रह होगा जहाँ माना जा रहा है कि संविधान के ख़िलाफ़ राय रखने वाले आगे हैं. |
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