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रविवार, 29 मई, 2005 को 17:21 GMT तक के समाचार
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यूरोपीय संविधान:कितना नया है?
फ़्रांस और यूरोपीय संघ के झंडे
संविधान पर कई देश जनमतसंग्रह कराएंगे
यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान पर फ़्रांस में रविवार को जनमतसंग्रह हुआ है. फ्रांस और जर्मनी की पहल पर बने इस संविधान पर कई अन्य देश भी जनमतसंग्रह कराने की घोषणा कर चुके हैं.

पेश हैं यूरोपीय संविधान की प्रासंगिकता से जुड़े कुछ तथ्य:

यूरोपीय संविधान की ज़रूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ सालों में यूरोपीय संघ का आकार लगातार बड़ा हुआ है और इसका स्वरुप भी पेचीदा होता गया है. साइप्रस से लेकर लिथुआनिया तक अब इसके 25 सदस्य हैं और नए सदस्य जोड़े जाने की भी बात चल रही है. ऐसे में यह बेहद ज़रूरी हो गया था कि कुछ ऐसे नियम क़ानून हों जिससे विवादों का हल निकाला जा सके. फ़िलहाल यूरोपीय संघ 1957 से बनी कुछ संधियों के आधार पर काम कर रहा है. नए संविधान का मक़सद इन पुरानी संधियों में नए प्रावधान जोड़कर नई संधि तैयार करना है.

इस संविधान को लिखा किसने है?

नए संविधान का विचार फ्रांस और जर्मनी ने दिया. पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति गैस्कार्ड देस्तां की अगुवाई में एक संविधान समिति ने इसे तैयार किया और फिर 2004 में यूरोपीय नेताओं ने इसे अंतिम रूप दिया. वैसे नए संविधान में ज़्यदातर पुराने प्रवाधानों को ही नए सिरे से लिखा गया है.

तो फिर इसमें नया क्या है?

एक अहम बदलाव ये है कि अगर सभी सदस्य देश किसी मुद्दे पर सहमत नहीं होते हैं, तो भी यूरोपीय संघ कई मुद्दों पर फ़ैसला कर सकता है. इसके अलावा संघ के किसी क़दम को रोकने के लिए ज़रुरी मतों की संख्या को भी बदला गया है. इस संविधान में यूरोपीय संघ की शक्तियों और उसके क़ानूनी दर्जे को भी परिभाषित किया गया है. इसमें अपना झंडा और अपना राष्ट्र गीत होने जैसी चीज़ें शामिल हैं. संविधान में यूरोपीय संघ के ढाँचे को सरल बनाने की कोशिश की गई है. इसमें यूरोपीय विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के वकील के पद भी बनाए गए हैं. इसके अलावा संविधान में यूरोपीय नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करने पर भी बात की गई है.

पहले की तुलना में ऐसी क्या चीज़े हैं जो नहीं बदली हैं?

एक तरीके से देखा जाए तो नए संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यूरोपीय संघ के कामकाज के तरीके में कोई बदलाव आए. यूरोपीय आयुक्त, संसद और मंत्रिपरिषद, तीनों कमोबेश पहले की ही तरह काम करेंगे.

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