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सोमवार, 30 मई, 2005 को 13:12 GMT तक के समाचार
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फ्रांस के फ़ैसले के बाद यूरोप में विचार
फ़्रांस में जनमत संग्रह
फ़्रांस में 55 प्रतिशत मतदाताओं ने यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान को ठुकरा दिया
यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान को फ़्रांस में स्वीकृति नहीं मिल पाने के बाद यूरोप के विभिन्न देशों में नई स्थिति पर विचार चल रहा है.

स्वयं फ़्रांस के प्रधानमंत्री ज़ां पिये रफ़रां के राजनीतिक भविष्य पर संदेह के बादल मंडराने लगे हैं.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि अभी ये कहना जल्दीबाज़ी होगा कि फ़्रांस के नतीजे के बाद ब्रिटेन में भी यूरोपीय संघ के संविधान पर जनमत संग्रह होगा या नहीं.

जुलाई महीने से यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ब्रिटेन को मिलनेवाली है जो छह महीने तक ये दायित्व उठाएगा.

विचार

टोनी ब्लेयर
यूरोपीय संघ की अध्यक्षता जुलाई से ब्रिटेन के पास जानेवाली है

ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने टोनी ब्लेयर से माँग की है कि वह इस समझौते को मृत घोषित कर दें.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ इस संबंध में छह जून को बयान जारी करेंगे.

रविवार को फ्रांस में हुए जनमत संग्रह ने 55 प्रतिशत लोगों ने संविधान के विरोध में और 45 प्रतिशत लोगों ने पक्ष में मत डाला जिसके बाद यूरोपीय संघ में संकट की स्थिति पैदा हो गई है.

बुधवार को एक अन्य देश नीदरलैंड में भी जनमत संग्रह होना है और अगर वहाँ भी इस संविधान को मंज़ूरी नहीं मिली तो संकट और गहरा जाएगा.

यूरोपीय देशों के नेता 16 जून को बैठक करनेवाले हैं जिसमें यूरोपीय संघ के भविष्य पर चर्चा होगी.

फ्रांस

फ़्रांस में रविवार के जनमत संग्रह के बाद देश की घरेलू राजनीति पर अच्छा-ख़ासा प्रभाव पड़ सकता है.

ऐसी अटकलें हैं कि इस नतीजे के बाद फ़्रांस के प्रधानमंत्री ज़ां पिए रफ़रां को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है.

रफ़रां ने अभी इस्तीफ़े के बारे में कुछ नहीं कहा है और प्रतीक्षा करने की बात की है.

संवाददाताओं का कहना है कि उनके हटने की सूरत में फ़्रांस के गृहमंत्री डोमिनिक़ विलेपां और एक अन्य लोकप्रिय राजनेता निकोलस सारकोज़ी नेतृत्व संभाल सकते हैं.

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