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तुर्की की सदस्यता: बातचीत पर सहमति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ और तुर्की के बीच तुर्की को सदस्यता देने के बारे में अगले वर्ष अक्तूबर में बातचीत शुरू होगी. दोनों पक्षों के बीच ब्रसेल्स में गहन चर्चा के बाद अंततः इस बारे में सहमति हो गई है. दरअसल तुर्की के पड़ोसी राष्ट्र साइप्रस को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद थे. तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर क़ब्ज़ा कर रखा है और साइप्रस के दक्षिणी हिस्से वाली सरकार को वह मान्यता नहीं देता. साइप्रस के इस दक्षिणी हिस्से को अंतरराष्ट्रीय जगत एक अलग राष्ट्र मानता है और यूरोपीय संघ में भी उसे सदस्यता दी गई है. लेकिन अब तुर्की ने ब्रसेल्स में दो दिनों की गहन बातचीत के बाद कहा है कि वह यूरोपीय संघ में साइप्रस के अस्तित्व को स्वीकार सकता है. मगर तुर्की के प्रधानमंत्री रज़्ज़प तायिप अर्दोगन ने कहा है कि इस सहमति का ये मतलब कतई नहीं है कि तुर्की ने साइप्रस को मान्यता दे दी है. तुर्की को अगर यूरोपीय संघ में शामिल किया जाता है तो यूरोपीय संघ की सीमा मध्य पूर्व तक पहुँच जाएगी. साथ ही तुर्की यूरोपीय संघ का अकेला मुस्लिम बहुल राष्ट्र भी बन पाएगा. प्रतिक्रियाएँ अमरीका ने तुर्की और यूरोपीय संघ के बीच सहमति का स्वागत किया है और तुर्की के प्रधानमंत्री की सराहना की है. अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि यूरोपीय मूल्यों से तुर्की में लोकतंत्र को मज़बूती मिलेगी. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी सहमति का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पता चलता है कि इस्लाम और मुस्लिम जगत में सभ्यता की कोई बुनियादी लड़ाई नहीं है. मगर फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक ने कहा है कि तुर्की को अभी भी सदस्यता मिलने की गारंटी नहीं है. फ़्रांस और ऑस्ट्रिया ने तुर्की को सदस्य बनाने का विरोध किया है और कहा है कि इस मुद्दे पर फ़्रांस और ऑस्ट्रिया में जनमत संग्रह करवाया जाएगा. |
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