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गुरुवार, 28 अक्तूबर, 2004 को 06:49 GMT तक के समाचार
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यूरोपीय संघ की मुख्य संस्थाएँ

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दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठनों में से एक
यूरोप के 25 देशों के संगठन यूरोपीय संघ को चलाने के लिए कई संस्थाएँ हैं. लेकिन संघ की क़ानूनी प्रक्रिया में मुख्य तौर पर इनमें से तीन संस्थाओं की भागीदारी होती है. ये हैं- यूरोपीय संघ की परिषद या काउंसिल, यूरोपीय संसद और यूरोपीय आयोग. इन तीनों संस्थाओं परस्पर विश्वास और साथ काम करने पर ही यूरोपीय संघ का सुचारू कार्य निर्भर करता है.

यूरोपीय संघ की काउंसिल या परिषद

यह सदस्य देशों की सरकारों की प्रतिनिधि संस्था है. इसे पहले मंत्रिपरिषद के नाम से जाना जाता था. हर सदस्य राष्ट्र को बारी-बारी से इसकी अर्द्धवार्षिक अध्यक्षता सौंपी जाती है.

परिषद की बैठकों में सदस्य देशों के कौन से मंत्री भाग लेंगे यह निर्भर करता है बैठक के मुद्दे पर. मतलब यदि विदेश नीति से जुड़ा कोई मामला हो तो उस बैठक में सदस्य देशों के विदेश मंत्री भाग लेंगे.

सदस्य देशों के आकार के हिसाब से परिषद में उन्हें मत दिए गए हैं.

यूरोपीय संसद

यह निर्वाचित सदस्यों की संस्था है. इसके सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन से पाँच साल के लिए चुने जाते हैं.

इस समय इसकी सदस्य संख्या 626 है, और सर्वाधिक 99 सदस्य जर्मनी से आते हैं. संघ के हाल में हुए विस्तार के बाद अब इसकी सदस्य संख्या और पैटर्न में बदलाव होगा.

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करोड़ों लोगों की उम्मीद है यूरोपीय संघ

संसद की मुख्य बैठकें स्ट्रासबर्ग में होती हैं.

संसद यूरोपीय आयोग द्वारा बनाए गए नियम-क़ानूनो के मसौदे पर अपनी राय देती है. आयोग द्वारा प्रस्तावित किसी अंतरराष्ट्रीय संधि पर संसद की सहमति अनिवार्य है.

संसद यूरोपीय संघ में विचार-विमर्श का केंद्र है जहाँ बहसों में तरह-तरह की राष्ट्रीय और राजनीतिक विचारधाराएँ देखने को मिलती हैं. संघ पर लोकतांत्रिक नियंत्रण का साधन भी संसद ही है.

यूरोपीय आयोग

यह यूरोपीय हितों के लिए काम करने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था है.

नवगठित आयोग के 25 सदस्य हैं यानी हर सदस्य देश से एक. आयोग को पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता मिली हुई है.

इसका मुख्य काम है यूरोपीय हितों की रक्षा करना. यही वह संस्था है जिसे नए क़ानून बनाने का अधिकार है.

आयोग यूरोपीय संसद के प्रति जवाबदेह है. यदि संसद आयोग के ख़िलाफ़ निंदा प्रस्ताव पारित कर दे तो संपूर्ण आयोग को इस्तीफ़ा देना पड़ता है. मार्च 1999 में ऐसा हुआ भी जब आयोग के अध्यक्ष ज्याक़ सैंतेर को सामूहिक इस्तीफ़ा सौंपना पड़ा था.

आयोग के अध्यक्ष को सदस्यों को चुनने का अधिकार नहीं है, वह सदस्य देशों की सरकार द्वारा नामांकित सदस्यों के बीच अलग-अलग कार्यभार ही बाँट सकते हैं.

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