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तुर्की को यूरोपीय संघ की वार्ता की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने तुर्की को सदस्यता दिए जाने के बारे में उसके साथ अगले वर्ष से बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है. संघ ने कहा है कि तुर्की की सदस्यता पर अगले साल तीन अक्तूबर से बातचीत शुरू की जा सकती है. यूरोपीय संघ के नेताओं ने ब्रसेल्स में गुरूवार को एक शिखर बैठक में ये फ़ैसला किया. इस बैठक में सभी 25 सदस्य देशों के नेता उपस्थित थे. हालाँकि बैठक की अध्यक्षता करनेवाले हॉंलैंड के प्रधानमंत्री यान पेटर बल्कनेन्ड ने कहा है कि तुर्की को सदस्यता देने के बारे में सदस्यों में अभी भी मतभेद हैं. बातचीत यान पेटर बल्कनेन्ड ने बताया कि तुर्की को पूर्ण सदस्यता देने के बारे में बातचीत 15 वर्ष तक चल सकती है. मगर उन्होंने कहा कि तुर्की के यूरोपीय संघ में प्रवेश की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती. तुर्की को अगर यूरोपीय संघ में शामिल किया जाता है तो यूरोपीय संघ की सीमा मध्य पूर्व तक पहुँच जाएगी. साथ ही तुर्की यूरोपीय संघ का अकेला मुस्लिम बहुल राष्ट्र भी बन पाएगा. शर्त तुर्की के पड़ोसी राष्ट्र साइप्रस के प्रश्न पर तुर्की और यूरोपीय संघ के बीच अभी भी सहमति नहीं बन सकी है. यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि तुर्की को पहले साइप्रस को अलग राष्ट्र के तौर पर मान्यता देनी पड़ेगी तभी जाकर तुर्की को सदस्यता दिए जाने के विषय पर बातचीत हो सकेगी. तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर क़ब्ज़ा कर रखा है और उसने कह रखा है कि वह साइप्रस को मान्यता देने के मामले पर नहीं झुकेगा. साइप्रस के दक्षिणी भाग को अंतरराष्ट्रीय जगत में एक अलग राष्ट्र के तौर पर मान्यता मिली हुई है और वह यूरोपीय संघ का एक सदस्य है. वैसे अभी इस बारे में यूरोपीय नेता तुर्की के प्रधानमंत्री रज़्ज़प तायिप अर्दोगन के साथ बातचीत करेंगे. अर्दोगन कह चुके हैं कि तुर्की साइप्रस के बारे में कोई फ़ैसला करने के लिए हमेशा तैयार रहा है बशर्ते उससे तुर्की के हित पर उल्टा असर ना पड़ता हो. |
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