| साइप्रस में मतदान, विभाजन बरक़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
साइप्रस द्वीप के फिर से एकीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र की योजना यूनानी हिस्से वाले साइप्रसवासियों ने ख़ारिज कर दी है. तीन-चौथाई से भी अधिक लोगों ने इसके विरोध में मतदान किया. आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार तुर्क हिस्से वाले साइप्रसवासियों में से 65 फ़ीसदी ने इसका समर्थन किया. दोनों ही हिस्सों को इसका अनुमोदन करना था मगर ऐसा नहीं हुआ है. जनमत संग्रह ऐसे समय पर हुआ है जब एक सप्ताह बाद साइप्रस यूरोपीय संघ में शामिल होने वाला है. यूरोपीय आयोग ने इस फ़ैसले पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा है कि इसके बाद सिर्फ़ यूनानी हिस्से वाले साइप्रस पर ही यूरोपीय संघ के नियम और क़ानून लागू होंगे. अमरीका और यूरोपीय संघ का नोटिस अमरीका और यूरोपीय संघ दोनों ने यूनानी हिस्से वाले साइप्रस के लोगों को नोटिस दे दिया था कि अगर उन्होंने एकीकरण की योजना के ख़िलाफ़ मतदान किया, तो तुर्क साइप्रस के अलगाव को ख़त्म करने की कोशिश की जाएगी. बीबीसी संवाददाता जॉनी डायमंड का कहना है कि साइप्रस के दोनों हिस्सों को फिर से एकीकृत करने की योजना के लिए तुर्क हिस्से वाले साइप्रस के लोगों का समर्थन एक ऐतिहासिक रुझान को पलट रहा है, जिसके तहत उन्हें निराकरणवादियों के तौर पर पेश किया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव, कोफ़ी अन्नान की ओर से तैयार की गई योजना के तहत, द्वीप के लिए एक ढीले-ढाले संघीय ढाँचे का प्रावधान है. तुर्की के हमले के बाद अपने घरों को छोड़ कर भाग गए यूनानी हिस्से वाले साइप्रस के लोगों को अपने घरों को लौटने दिया जाएगा और वे अपनी कुछ ज़मीन-जायदाद भी हासिल कर सकेंगे. लेकिन यूनानी पक्ष इस बात से नाख़ुश है कि इस योजना के तहत वापसी के उनके अधिकार को सीमित कर दिया गया है, जबकि 1974 के बाद बसे दसियों हज़ार तुर्कों को वहाँ बने रहने की इजाज़त दे दी गई है. तुर्की के सैनिकों को भी द्वीप पर अपनी सीमित सैनिक टुकड़ी बनाए रखने दिया जाएगा. |
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